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राजस्‍थान सरकार कोरोना मरीजों में साइलेंट हाइपोक्सिया को मात देने के लिए खरीद रही 12 हजार पल्स ऑक्सीमीटर

राजस्‍थान सरकार कोरोना मरीजों में साइलेंट हाइपोक्सिया को मात देने के लिए खरीद रही 12,000 पल्स ऑक्सीमीटर

जयपुर। कोरोना के लक्षण नहीं होने पर भी संक्रमित लोगों की शीघ्र पहचान करने के लिए राजस्‍थान सरकार 12 हजार पल्स ऑक्सीमीटर खरीद रही है। इतनी बड़ी संख्‍या में पल्‍स मीटर खरीदने का उद्देश्‍य प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्‍यु को रोकना है। राज्य सरकार उन रोगियों की पहचान करने के लिए उपाय कर रही है।

pulse oximeter
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा, हम 12,000 पल्स ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं। कोरोना रोगियों में साइलेंट हाइपोक्सिया को मात देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर पल्स ऑक्सीमीटर का उपयोग करने का निर्णय लिया है जो कि मरीज में उभरते संकट के बारे में पहले से चेतावनी दे सकता है। पल्‍स ऑक्सीमीटर द्वारा प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाकर जल्‍द ही उनका इलाज आरंभ किया जा सकेगा।
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बता दें पल्स ऑक्सीमीटर एक चिकित्सीय उपकरण है जो मरीज के रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी करता है । यह एक ऐसा यंत्र है जिसके माध्यम से मानव शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाया जाता है। इसे मरीज की उँगलियों, नाक, कान अथवा पैरों की उँगलियों में क्लिप की तरह लगाया जाता है। इसमें लगे सेंसर रक्त में ऑक्सीजन के प्रवाह तथा रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को पता लगाने में सक्षम होता है। उपकरण SpO2 स्तर को मापता है, जिसे रक्त में ऑक्सीजन स्तर के रूप में भी जाना जाता है।

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डाक्टर बलवंत मंडा, मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (जोधपुर) ने कहा कि कोरोना रोगियों में, साइलेंट हाइपोक्सिया का अधिक खतरा होता है यानी कि शरीर में ऑक्सीजन का अभाव। यह काफी खतरनाक है क्योंकि ऑक्सीजन का स्तर इतनी खामोशी से गिरता है कि एक मरीज को पता ही नहीं चलता है कि वह साइलेंट हाइपोक्सिया की ओर बढ़ रहा है। जब यह 90% से नीचे खतरनाक स्तर से आगे निकल जाता है, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी बन जाता है। तो ऐसे मामलों में, पल्स ऑक्सीमीटर की भूमिका जीवन-रक्षक साबित हो सकती है।

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राज्य के सबसे अधिक प्रभावित कोविड जिले के होने के बावजूद, जोधपुर में मृत्यु दर सिर्फ 1.2% है, जो कि औसत राज्य की मृत्यु दर से बहुत कम है, जो वर्तमान में 1.6% है। उन्‍होंने बताया कि हमारे पास 1,200 पल्स ऑक्सीमीटर हैं, उनमें से लगभग आधे हमने खरीदे हैं जबकि बाकी उनमें से दान किए गए हैं। हमारी टीम उन लोगों के ऑक्सीजन की जांच करती है जो उच्च जोखिम में हैं जैसे कि किडनी, लिवर, हार्ट मरीज और बुजुर्ग और जो लोग पुरानी बीमारियों से ग्रसित हैं। ये डिवाइस लोगों को साइलेंस हाइपोक्सिया की ओर बढ़ने से बचाने में बहुत सहायक सिद्ध हुआ है।

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स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी ने कहा कि राजस्‍थान के कुछ अन्‍य हिस्सों में, जहां डॉक्टरों ने होम्योपैथिक रोगियों को होम आइसोलेशन के तहत रखा है, ऐसे रोगियों को घर पर पल्स ऑक्सीमीटर रखने के लिए कहा गया है। उन्‍होंने बताया कि, जिन्होंने होम आइसोलेशन का विकल्प चुना, हम उन्हें पहले पल्स ऑक्सीमीटर और एक थर्मामीटर खरीदने के लिए कहते हैं, ताकि वे नियमित रूप से उसके तापमान और ऑक्सीजन की निगरानी कर सकें। पल्स ऑक्सीमीटर के बिना, हम होम आइसोलेशन की अनुमति नहीं देते हैं। अगर ऑक्सीजन लेवल गिरता है, तो होम आइसोलेशन के तहत रोगी तुरंत स्वास्थ्य अधिकारियों को फोन करता है।

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जानिए क्या होता है हाइपोक्सिया
हाइपोक्सिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त और शरीर के ऊतकों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होता है। सामान्यतः हाइपोक्सिया पूरे शरीर या शरीर के कुछ हिस्से को प्रभावित कर सकता है।अमेरिकी गैर-लाभकारी संगठन 'मायो क्लिनीक' के अनुसार, सामान्य तौर पर धमनियों में ऑक्सीजन की मात्रा 75-100 (mm Hg) तथा पल्स-ऑक्सीमीटर (Pulse-Oximeter) की माप 90-100% होता है। पल्स-ऑक्सीमीटर का 90% से कम होना चिंताजनक होता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति सुस्ती, भ्रम, मानसिक तौर पर अस्वस्थ महसूस करता है। पल्स-ऑक्सीमीटर की माप का स्तर 80% से कम होने से शरीर के महत्त्वपूर्ण अंग प्रभावित होते हैं।

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