राजस्थान चुनाव: शेरगांव को आजादी के बाद मिला मतदान का मौका, पहली बार और क्या-क्या हुआ?
राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार कई चीजें पहली बार हुई हैं। सिरोही जिले के एक गांव को तो आजादी के बाद से अबतक कभी मतदान का मौका मिला ही नहीं था।
राजस्थान की 200 सीटों में से 199 सीटों के लिए शनिवार को मतदान हुआ है। इस बार के चुनाव में राज्य में कई चीजें पहली बार देखने को मिली हैं।

1) राजस्थान के आबू-पिंडवाड़ा विधानसभा सीट के शेरगांव के वोटरों को अबतक अपने गांव में मतदान का अवसर नहीं मिला था। क्योंकि, सिरोही जिले का यह गांव 4,921 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां तक पहुंचना काफी मुश्किल है।
लेकिन, इस बार चुनाव आयोग ने शेरगांव में भी पोलिंग बूथ बनाया था, जहां तक पहुंचने के लिए मतदानकर्मियों को 18 किलोमीटर पगडंडियों की यात्रा करनी पड़ी। अपने गांव में जिन महिलाओं को वोट डालने का मौका मिला, वह बहुत ही उत्साहित नजर आईं।
2) राजस्थान विधानसभा चुनाव में पहली बार बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को घर बैठे मतदान की सुविधा मिल पाई है। इससे पहले उपचुनाव में इसका प्रयोग जरूर हुआ था, लेकिन विधानसभा चुनाव यह पहली बार हुआ है।
राज्य में 11.8 लाख वोटरों की उम्र 80 लाख से ज्यादा है, जिन्हें वोटिंग फ्रॉम होम का मौका मिला है। वहीं 40 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं को भी अपने घर पर ही वोट डालने का अवसर मिला है।
3) इसी तरह राजस्थान में इस बार 70 हजार से ज्यादा नवविवाहिताओं को पहली बार अपने ससुराल में ही मतदान करने का मौका मिला है। इन महिलाओं ने अपने ससुराल के मतदान केंद्रों पर घूंघट की आड़ में वोट डाले।
4) राजस्थान में जयपुर के एक बूथ पर एक ही परिवार के 48 लोग एक साथ ढोल-नगाड़े की थाप पर नाचते हुए मतदान के लिए पहुंचे। एक साथ पहली बार वोट डालने पहुंचे परिवार के इतने सदस्यों की तस्वीर एक बार में कैमरे में आने में भी मुश्किल थी।
5) राजस्थान विधानसभा चुनावों में इस बार 22 लाख से ज्यादा युवाओं को चुनाव आयोग ने पहली बार मतदान में हिस्सा लेने का मौका दिया है। राज्य में कुल 22.71 लाख मतदाता फर्स्ट टाइम वोटर के तौर पर दर्ज हुए हैं।
6) राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार उदयपुर का बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। खासकर बीजेपी ने अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ इसे चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है।
शनिवार को हुई वोटिंग में आतंकी घटना के शिकार हुए कन्हैयालाल टेलर के दोनों बेटे यश और तरुण ने भी पहली बार मतदान किया। उन्होंने उदयपुर के गोवर्धन विलास सरकारी स्कूल में बने बूथ पर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
7) वहीं जयपुर के सांगानेर विधानसभा सीट पर पाकिस्तान से भारत आए पीड़ित हिंदू डॉक्टर दंपति अशोक और निर्मला माहेश्वरी ने पहली बार भारतीय नागरिक के रूप में अपना वोट डाला। आखिरी बार उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रीय चुनावों के लिए 2013 में वोट डाला था। ये पाकिस्तानी हैदराबाद के रहने वाले थे, लेकिन वहां धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आकर शरण लिया है।
8) झालावाड़ में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया ने हाउसिंग बोर्ड स्थित मतदान केंद्र में वोट डाला। खास बात यह रही कि वसुंधरा अपने पोते विनय प्रताप के साथ वोट डालने पहुंचीं थीं। उन्होंने पहली बार मतदान किया है।












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