राजस्थान में बीजेपी को भारी न पड़ जाए सांसदों को टिकट देना, जानें बागियों की कितनी लंबी हुई लिस्ट?

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने पहली लिस्ट में ही 7 सांसदों को टिकट दे दिया। लेकिन, लगता है कि पार्टी का यह फैसला पहले से उसके टिकट के दावेदार इतने आसानी से पचाने के लिए तैयार नहीं है। खुलेआम बगावत का बिगुल फूंका जा रहा है।

41 उम्मीदवारों की पहले लिस्ट में पार्टी ने 6 लोकसभा सांसदों को जो टिकट दिया है, उसकी वजह से उनकी संबंधित सीटों पर पार्टी के अंदर से ही भारी विरोध उभर आए हैं। कोटा, भरतपुर, जालौर, अजमेर और जयपुर जिलों के स्थानीय टिकट दावेदारों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।

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भाजपा ने पहली लिस्ट में 7 सांसदों को दिया है टिकट
मसलन, किशनगढ़ सीट से 2018 में पार्टी के उम्मीदवार रहे विकास चौधरी इस बार टिकट कटने से काफी नाराज हैं। उन्होंने ईटी से बातचीत में कहा है, 'मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगा। मैंने अपने चुनाव क्षेत्र के लिए कड़ी मेहनत की है, लेकिन अब पार्टी ने एक सांसद को टिकट दे दिया है। मैं हर किसी को चुनौती देता हूं कि एक सर्वे करे और देखे कि किसको समर्थन मिलता है, 70 वर्षीय व्यक्ति को या मेरे जैसे एक युवा नेता को।' बीजेपी ने इस सीट पर अजमेर के सांसद भगीरथ चौधरी को टिकट दिया है।

बीजेपी के टिकट की उम्मीद में बैठे उम्मीदवारों ने शुरू की बगावत
यही हाल सांचौर विधानसभा क्षेत्र का भी है। यहां भाजपा ने जालौर के पार्टी सांसद देवजी पटेल को उम्मीदवार बनाया है। इससे यहां पार्टी संगठन में इतनी नाराजगी पैदा हो गई कि जालौर जिले के 8 मंडल अध्यक्षों में से 6 ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को इस्तीफे के साथ एक साझा विरोध पत्र भेज दिया।

यहां भाजपा के टिकट के दो दावेदार थे- जीवराम चौधरी और धनराम चौधरी। दोनों ने ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। पिछले हफ्ते पार्टी के इस फैसले के खिलाफ भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार पटेल की कार पर कार्यकर्ताओं की ओर से पत्थरबाजी की घटना भी सामने आई थी।

पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं बागी
इसी तरह से अलवर की तिजारा सीट पर भी पार्टी को बागी से चुनौती मिल रही है। यहां अलवर के सांसद महंत बालकनाथ को टिकट दिए जाने के खिलाफ पूर्व एमएलए मामन सिंह यादव खुलकर सामने आ चुके हैं। उन्होंने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कही है।

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को टिकट देने का भी विरोध
इसी तरह से भारतीय जनता पार्टी ने जयपुर की झोटवाड़ा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री और जयपुर ग्रामीण से पार्टी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पर दांव लगाने का फैसला किया है। यहां पार्टी के टिकट दावेदार रहे आशु सिंह सुरपुरा ने उनके खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। वहीं पूर्व विधायक राजपाल सिंह शेखावत ने एक्स (ट्विटर) पर वीडियो पोस्ट करके झोटवाड़ा में खुद को मिल रहे समर्थन दिखाने की कोशिश की है।

सुरपुरा के मुताबिक, 'मैंने 14 वर्षों से क्षेत्र की सेवा की है। कोविड के दौरान जब सारे नेता घरों में बैठे थे, तब मैं लोगों की मदद के लिए घर-घर गया। 2018 में बीजेपी ने मुझे निर्दलीय चुनाव लड़ने से रोक दिया था। लेकिन, मुझे भी लोगों को जवाब देना है। मैं फिर से यह नहीं कर सकता।' वहीं शेखावत ने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें राठौड़ की उम्मीदवारी के विरोध के साथ ही नारे लग रहे हैं, 'झोटवाड़ा का एक ही लाल, राजपाल-राजपाल'।

बगावत करने वालों में वसुंधरा राजे के समर्थकों का भी नाम
यही हाल भरतपुर के नगर और कोटा की लाडपुरा विधानसभा सीटों की भी है। अनिता सिंह गुर्जर ने नगर और भवानी सिंह राजावत ने लाडपुरा से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। राजावत ने उसी अखबार से कहा है, '2018 में एक बार मुझे नजरअंदाज किया जा चुका है। मैं निर्दलीय के रूप में लड़ूंगा। मैंने यह बताते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को लिखा है।'

खास बात ये है कि राजपाल शेखावत, गर्जुर और राजावत तीनों को ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है। इसी तरह भाजपा ने झुंझुनूं से पार्टी सांसद नरेंद्र कुमार को जिले की मंडावा सीट से प्रत्याशी बनाया है। यहां राजेंद्र भांबू ने उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़कर चुनौती देने की ठानी है।

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