Kota Infant Death Case: ICU की खराब हालत पर सीएम बोले- 'लोगों को आलोचना का अधिकार'
कोटा। राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में बीते महीने 100 से अधिक बच्चों की मौत हो गई है। लगातार हो रही बच्चों की मौत से विपक्ष सरकार पर हमलावर है। बच्चों की मौत के पीछे का कारण अस्पताल के आईसीयू की खसता हालत भी बताई जा रही है। बीते साल से अब तक अस्पताल में मरने वाले बच्चों की संख्या करीब 950 हो गई है। अब आईसीयू की खराब हालत पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान आया है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा, 'ये तो आप देश के अंदर, प्रदेश के अंदर, कहीं जाएंगे, अस्पताल के अंदर कुछ कमियां मिलेंगी, उसकी आलोचना करने का हक मीडिया और लोग रखते हैं, उससे सरकार की आंखें खुलती हैं, और सरकार उसको सुधारती है।' हालांकि अस्पताल में मरम्मत का काम शुरू हो गया है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा और केंद्र की ओर से अधिकारी आज अस्पताल का दौरा भी करेंगे। इस बीच हैरानी की बात ये रही कि शर्मा के आने की तैयारी के लिए अस्पताल में कार्पेट तक बिछवाया गया। जिसे विरोध के बाद हटा दिया गया है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने किया दौरा
इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की टीम ने भी अस्पताल का दौरा किया था। टीम ने बच्चों की मौत के पीछे के कारणों को जानने की कोशिश की। जो चीजें सामने आईं वो चौंका देने वाली थीं। आयोग ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी कर कार्रवाई की मांग की। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानुंगो ने कहा, 'ये स्पष्ट है कि अस्पताल की खिड़कियों पर शीशे नहीं हैं, दरवाजे टूटे हुए हैं, यही वजह है कि जिन बच्चों को यहां इलाज के लिए भर्ती कराया गया उनकी सेहत को खराब मौसम से नुकसान पहुंचा।'
अस्पताल का सामान्य रखरखाव 'सबसे खराब स्थिति' में
उन्होंने यहां तक कहा कि अस्पताल का सामान्य रखरखाव 'सबसे खराब स्थिति' में है। कानुंगो ने नोटिस में कहा है, 'अस्पताल के परिसर में सुअर घूमते हुए देखे गए हैं। यहां स्टाफ की भारी कमी है।' गौरतलब है कि मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चों की मौत को लेकर कहा था कि केवल उन्हीं बच्चों की मौत हुई है, जो बहुत नाजुक स्थिति में अस्पताल लाए गए थे। इनमें कुछ ऐसे थे जो जन्म के साथ ही कमजोर थे और किसी दूसरे अस्पताल से सरकारी अस्पताल में लाए गए।












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