'PM Modi सिर्फ दिखावा, असल में कुछ नहीं' राहुल गांधी का मोदी पर तीखा हमला, OBC समाज के लिए जताया अफसोस
Rahul Gandhi on Modi: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित 'भागीदारी न्याय सम्मेलन' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर करारा हमला बोला। इस सम्मेलन में राहुल गांधी का संबोधन महज एक भाषण नहीं था, बल्कि उसमें उनके आत्ममंथन की झलक भी साफ तौर पर दिखाई दी।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को "सिर्फ दिखावा और कोई ठोस काम नहीं" करार देते हुए कहा कि देश की राजनीति में उन्हें अनावश्यक रूप से बहुत अधिक महत्व दे दिया गया है।

इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि अपने दो दशकों से भी अधिक लंबे राजनीतिक सफर में वे OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदाय के हितों की रक्षा करने में विफल रहे। उन्होंने इस कमी को अपनी व्यक्तिगत गलती बताते हुए इसे सुधारने का संकल्प भी लिया।
"नरेंद्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं" -Rahul Gandhi
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से सवाल किया, "आप जानते हैं राजनीति की सबसे बड़ी समस्या क्या है?" इस पर जब भीड़ से किसी ने कहा, "नरेंद्र मोदी!", तो राहुल ने तुरंत पलटकर जवाब दिया, "नहीं, नरेंद्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं।"
रायबरेली से सांसद राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से दो-तीन बार मुलाकात की है और उन्हें नहीं लगता कि वे राजनीति की सबसे बड़ी समस्या हैं। उन्होंने कहा, "मैंने पहले मोदी जी से कभी नहीं मिला था, लेकिन अब मिला हूं दो-तीन बार। अब समझ में आया कि उनके अंदर कुछ भी नहीं है। वह सिर्फ दिखावा हैं, कोई ठोस बात नहीं है। आप लोग नहीं मिले हैं, मैं मिला हूं।"
VIDEO | Addressing a gathering in Delhi earlier today, Congress MP Rahul Gandhi (@RahulGandhi) said, "You know what is the biggest problem in politics... No, Narendra Modi is not a big problem (he said responding to a voice in the crowd)."
He added, "I am telling you, you have… pic.twitter.com/p993b9JBbq
— Press Trust of India (@PTI_News) July 25, 2025
इतना ही नहीं राहुल गांधी ने मीडिया पर भी आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री को बेवजह बड़ा बनाकर पेश करता है। राहुल ने कहा कि आप सब ने उन्हें जरूरत से ज्यादा महत्व दे दिया है, जो कि हकीकत नहीं है।
OBC समाज को नहीं दे सका हक: राहुल गांधी
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने एक आत्ममंथन करते हुए यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में एक बड़ी चूक की - OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) समाज के हितों की पर्याप्त रक्षा नहीं कर सके। उन्होंने कहा, "मैं 2004 से राजनीति में हूं, यानी 21 साल हो गए हैं। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि मैंने एक गलती की - मैं OBC समुदाय की रक्षा उस तरह नहीं कर पाया, जैसे मुझे करनी चाहिए थी।"
राहुल ने स्पष्ट किया कि यह गलती कांग्रेस पार्टी की नहीं, बल्कि उनकी अपनी थी। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की गलती नहीं है, यह मेरी गलती है। उस समय मैं आपकी समस्याओं को गहराई से नहीं समझ पाया। राहुल गांधी ने कहा कि अगर उन्हें OBC समुदाय के इतिहास और संघर्षों की जानकारी पहले होती, तो वे पहले ही जातीय जनगणना की मांग को आगे बढ़ाते।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अगर मुझे OBC समाज का इतिहास, उनकी समस्याएं और उनकी असल स्थिति का थोड़ा भी अंदाज़ा होता, तो मैं उसी समय जातीय जनगणना करवा देता। उन्होंने मंच से जनता को यह भरोसा दिलाया कि अब वे इस गलती को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि "अब मैं इस गलती को सुधारूंगा। मैं इस दिशा में ठोस कदम उठाने जा रहा हूं।"
तेलंगाना जातीय सर्वे को बताया सही कदम
राहुल गांधी ने अपने भाषण में तेलंगाना में हुई जातीय जनगणना की सराहना करते हुए कहा कि यह एक "सही सोच और नीयत" से किया गया कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे सर्वेक्षणों से देश की सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद मिलती है। राहुल गांधी का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब देश में आगामी चुनावों को लेकर माहौल गर्म है और विपक्ष विशेषकर कांग्रेस, जातीय जनगणना को बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्वीकारोक्ति एक रणनीतिक कदम है जिससे OBC वोट बैंक को कांग्रेस की ओर मोड़ा जा सके। राहुल गांधी का यह बदला हुआ रुख यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब सामाजिक न्याय की राजनीति को प्राथमिकता देने जा रही है। खुद की गलती मानना और सुधारने का संकल्प लेना न केवल राजनीतिक रूप से साहसिक कदम है, बल्कि इससे जनता के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी बन सकता है।
राहुल गांधी के इस भाषण ने दो अहम संकेत दिए - एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "छवि" को चुनौती दी गई, तो दूसरी ओर OBC समुदाय के साथ पुराने रिश्ते सुधारने की कोशिश की गई। अब देखना यह होगा कि जनता इस आत्ममंथन और वादों को किस तरह लेती है और क्या कांग्रेस को इसका चुनावी लाभ मिल पाता है या नहीं।












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