Rahul in Manipur: मणिपुर को क्या संदेश देकर लौटे राहुल गांधी, मुद्दे को भटकाना कौन चाहता है?

Rahul Gandhi Manipur visit: सोमवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पिछले साल शुरू हुई हिंसक घटनाओं के बाद से तीसरी बार मणिपुर दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न राहत कैंपों का दौरा किया और जातीय संघर्ष के पीड़ितों से मिले और उनकी चुनौतियों से रूबरू भी हुए।

राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर जाने की वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने अपनी इस मांग को अभी भी कायम रखा है। वह यह भी दावा कर आए हैं कि विपक्ष में रहकर मणिपुर में शांति के लिए वे जो भी कर सकते हैं, करते रहेंगे और सरकार पर दबाव बनाना जारी रखेंगे।

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राहुल प्रेस कांफ्रेंस से अचानक क्यों उठ गए?
लेकिन, मणिपुर में उन्हीं की ओर से बुलाई गई एक प्रेस कांफ्रेंस में कुछ सवाल सुनकर वे जिस तरह से असहज हो गए और वहां से निकल पड़े उसको लेकर कुछ सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने ऐसा बर्ताव क्यों किया?

राहुल ने प्रेस कांफ्रेंस में क्या कहा?
जब कांग्रेस नेता ने प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बातें मीडिया के सामने रख दीं तो वहां मौजूद रिपोर्टरों ने उनके सामने कुछ सवाल रखे। इसपर उन्होंने कहा, '...प्लीज मैं जो कह रहा हूं उसका सम्मान कीजिए। मैं यहां पर एक साफ संदेश देने आया हूं....'

इससे पहले उन्होंने दावा किया कि 'मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए हम जो भी कर सकते हैं करेंगे....विपक्ष में रहते हुए कोई जो भी कर सकता है..मैं सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा हूं।'

मणिपुर के मुद्दे पर संसद में पीएम मोदी ने क्या कहा था?
कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक की मांग पर पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में विस्तार से बयान दिया था। उन्होंने बताया था कि राज्य का ज्यादातर हिस्सा आज सामान्य जीवन जी रहा है। मणिपुर में हालात को स्थिर बनाने के लिए सरकार हर संभव कोशिशें कर रही है।

उन्होंने विपक्षी दलों से मणिपुर के मसले पर राजनीति से ऊपर उठने का आह्वान करते हुए कहा था, 'कुछ तत्व आग में तेल डालने का काम कर रहे हैं...जिन्हें मणिपुर की जनता नकार देगी।'

मणिपुर मुद्दे को भटका कौन रहा है?
राहुल गांधी लगातार तीसरी बार मणिपुर के दौरे पर पहुंचे थे। वह हिंसा पीड़ितों से मिलकर प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे थे। लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी को यहां 48% वोट मिले हैं और वह दोनों ही सीटें जीती है। सवाल है कि फिर उन्हीं की ओर से बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में उन्हें पत्रकारों के सीधे सवाल का जवाब देने में क्या दिक्कत हुई?

राहुल ने कहा, '...मुझे उन सवालों का जवाब देने में दिलचस्पी नहीं है, जो मुद्दे को भटकाने के लिए तैयार किए गए हैं....मैंने अपना बयान दे दिया है।' प्रश्न है कि जब उन्हें सिर्फ अपना ही पक्ष रखना था तो वह अपना लिखित बयान भी मीडिया में जारी कर सकते थे। फिर प्रेस वालों को बुलाने की क्या आवश्यकता थी?

मणिपुर की ताजा हालात पर प्रधानमंत्री ने सदन में विस्तृत आंकड़े देश के सामने रखे हैं। यह राज्य पिछले साल 3 मई से ही जातीय संघर्ष में उलझा हुआ है और वहां की परिस्थितियों पर देश की सर्वोच्च अदालत की भी नजर रही है। इस दौरान प्रदेश में 200 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं।

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