विपक्ष का नेता बनने के बाद राहुल गांधी की कितनी बढ़ी धमक, सदन में क्या- क्या होगी भूमिका? जानिए
पिछले 10 वर्षों ने सदन में रिक्त पड़ा विपक्ष के नेता का पद अब भर गया है। इसके लिए राहुल गांधी को विपक्ष ने अपना नेता चुना है। सदन में इस पद के साथ अब राहुल गांधी की जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। अब उनकी सीबीआई निदेशक, मुख्य चुनाव आयुक्तों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और मुख्य सतर्कता आयुक्त समेत प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया समेत कई अहम प्रक्रियाओं में अब राहुल गांधी की अहम भूमिका होगी।
गांधी की सदन में वापसी और विपक्ष के नेता के रूप में नियुक्ति के बाद उनके दायित्व और अधिकार सदन में बढ़ गए हैं। उन्होंने बुधवार को निचले सदन में विपक्ष के नेता के रूप में पदभार संभाला लिया। दरअसल विपक्ष के नेता का पद पिछले 10 वर्षों से खाली था। इसकी प्रमुख वजह ये थी कि सदन में इस पद के लिए निर्धारित मानदंड पूरे करने की योग्यता किसी दल के नेता के पास नहीं थी।

पिछली दो लोकसभा में कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी सदन में कांग्रेस के नेता थे। राहुल गांधी विपक्ष के नेता बनने वाले गांधी परिवार के तीसरे सदस्य हैं। इससे पहले उनके पिता व पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी 1989-90 तक विपक्ष के नेता रहे, जब केंद्र में वीपी सिंह की सरकार सत्ता में थी। इसके बाद 1999 से 2004 के बीच राहुल गांधी की मां और पूर्व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने विपक्ष के नेता के रूप में कार्यभार संभाला। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार सत्ता में थी।
राहुल गांधी के सदन में कितनी धमक
विपक्ष के नेता बनने के साथ राहुल गांधी का सदन में सत्ता पक्ष के फैसलों की आलोचना के साथ मुद्दे उठाने की बढ़ी जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियों पर पदों में नियुक्ति प्रक्रिया में भी राहुल गांधी का रोल होगा। यानी सत्ता पक्ष के अलावा सदन में राहुल गांधी की अपनी धमक होगी, जो उन्हें आईएनडीआईए में शामिल दलों के समर्थन से मिली है।
सीबीआई निदेशक, मुख्य चुनाव आयुक्तों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और मुख्य सतर्कता आयुक्त समेत प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया समेत कई अहम चुनावी प्रक्रियाओं में राहुल गांधी का भी योगदान होगा।












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