Rahul Gandhi disqualified: सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, सदस्यता खत्म करने वाले नियम को चुनौती
Rahul Gandhi की सदस्यता रद्द होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पड़ी है। जिसमें उस नियम को चुनौती दी गई, जिसके तहत सजा होते ही सदस्यता खत्म हो जाती है।

हाल ही में सूरत कोर्ट ने मानहानि से जुड़े मामले में राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद लोकसभा सचिवालय ने नियमों के मुताबिक उनकी सदस्यता खत्म कर दी। अब इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। जिसमें दो साल की सजा होते ही ऑटोमैटिक सदस्यता खत्म होने वाले नियम को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस नियम का राजनीतिक लाभ उठाया जा रहा।
जानकारी के मुताबिक ये याचिका केरल की आभा मुरलीधरन ने दायर की है। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 8 (3) का राजनीतिक दल गलत इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे। ये राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग की जा रही। ये हमारे चुनावी प्रक्रिया में अशांति पैदा कर सकती है। ऐसे में जब भी किसी को दो साल की सजा हो तो उसकी सदस्यता तुरंत ना खत्म की जाए, बल्कि उसके अपराध की प्रवृत्ति, भूमिका आदि को देखकर इस पर फैसला लिया जाए।
किस मामले में राहुल को हुई सजा?
राहुल गांधी ने 2019 में कर्नाटक में रैली की थी। उस दौरान उन्होंने कहा था कि 'सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों'। उनका निशाना नीरव मोदी और ललित मोदी पर था। इस बयान के आधार पर गुजरात से बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने सूरत कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया। जिस पर अब कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें राहुल गांधी को दो साल जेल की सजा हुई। हालांकि उनको तुरंत जमानत दे दी गई।
क्या है अयोग्यता का नियम?
विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा या राज्यसभा के किसी भी सदस्य को अगर दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाती है। इसके अलावा वो अगले 6 साल तक के लिए अयोग्य रहते हैं और चुनाव नहीं लड़ सकते। पिछले एक साल में कई लोगों की सदस्यता इन नियम के आधार पर गई है।












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