'दागी' अध्यादेश की वापसी का श्रेय राहुल गांधी को नहीं!
वनइंडिया द्वारा कराए गए एक ओपिनियन पोल ने राहुल के पलड़े को पलट कर रख दिया। हमने अपने पाठकों से सवाल पूछा था कि 'दागी' अध्यादेश की वापसी का श्रेय किसे? जिसके जबाव में सिर्फ 34 फीसदी लोगों ने माना कि अधयादेश राहुल गांधी के जबाव में वापस लिया गया, जबकि 66 फीसदी लोगों का कहना है कि अध्यादेश उन लोगों के कहने पर वापस लिया गया जिन्होंने सरकार पर दबाव बनाया। आंकड़ा चौकाने वाला है, लेकिन खबर लिखे जाने तक कुल 3,920 लोगों ने इस पोल में हिस्सा लेकर पार्टी में राहुल गांधी के दबदबे की सच्चाई सामने ला दी। अध्यादेश वापसी का श्रेय सिर्फ 1,333 लोगों ने राहुल को राहुल को दिया है जबकि 2,587 लोगों ने माना कि सरकार पर दबाव के कारण इस अध्यादेश को वापस लिया गया। ये ओपिनियन पोल अभी भी खुला है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने जैसे ही दागियों के अध्यादेश को बेहूदा करार दिया वैसे ही उन्हीं कैबिनेट मंत्रियों को सांप सूंघ गया, जो कुछ देर पहले तक मनमोहन सिंह के साथ खड़े थे। वो अब एक-एक कर मनमोहन का साथ छोड़ राहुल गांधी के पक्ष में आ गये। मनीष तिवारी, राजीव शुक्ला, ऑस्कर फर्नाडिस, शशि थरुर ने बयान बदलने में देर नहीं की और 24 घंटे पहले जो तीन कैबिनेट मंत्री राष्ट्रपति को समझा कर आये थे कि अध्यादेश क्यों जरुरी है, वो अब मीडिया से लुका-छिपी का खेल खेलने लगे। वही जबकि ये अध्यादेश अब वापस लिया जा चुका है तो राहुल गांधी अपने बकवास वाले बयान पर सफाई दे रहे है। राहुल गांधी ने कहा है कि अध्यादेश को बकवास बताना गलत था, पर उनकी भावना सही थी। राहुल ने अपनी सफाई में कहा कि मैंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। मैंने बकवास शब्द का इस्तेमाल किया, जो गलत था, पर मेरी भावना सही थी।













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