Rahul Gandhi का दांव उलटा न पड़ जाए! क्यों गुजरात में कांग्रेस पर सवाल उठाकर मुसीबत मोल ले ली? 5 संकेत
Rahul Gandhi Congress: लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि उनकी पार्टी गुजरात में बीजेपी (BJP) को अगला चुनाव हरा कर दिखाएगी। लेकिन, हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन न सिर्फ हमेशा की तरह निराशाजनक रहा है, बल्कि बीजेपी ने अप्रत्याशित रूप से मजबूत जीत दर्ज की है।
इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने गुजरात कांग्रेस के कुछ नेताओं-कार्यकर्ताओं पर बीजेपी के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया है, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष की स्थिति पैदा होने का खतरा पैदा हुआ है। यह कदम कांग्रेस के लिए और भी घातक साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है।

Rahul Gandhi Congress: 1) कांग्रेस का आंतरिक संकट और असंतोष
राहुल गांधी के बयान से कांग्रेस के भीतर का अंतर्विरोध और कंफ्यूजन खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में दो तरह के लोग हैं - एक जो जनता के साथ खड़े हैं और दूसरे जो बीजेपी के साथ गुप्त रूप से मिलकर काम कर रहे हैं।
उनका यह बयान पार्टी के उन नेताओं का मनोबल तोड़ने वाला हो सकता है, जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। कांग्रेस के कई कार्यकर्ता और नेता इस बयान से आहत महसूस कर सकते हैं, जिससे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का भी मोहभंग होने का खतरा पैदा हो सकता है।
Rahul Gandhi BJP: 2) कांग्रेस के मौजूदा नेताओं की विश्वसनीयता पर सवाल
अहमदाबाद में पार्टी के लोगों के बीच राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस को अपने अंदर मौजूद 20-30 'गद्दारों' को निकालने की जरूरत है। यह बयान संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व को अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं पर भरोसा नहीं गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात कांग्रेस की पूर्व महिला अध्यक्ष जेनी ठुम्मर का कहना है कि जब कोई पार्टी 30 वर्षों से सत्ता से बाहर हो, तो उसके कार्यकर्ताओं के अन्य दलों से संपर्क बन जाना स्वाभाविक है। ऐसे में इन्हें पार्टी से निकालने की जगह, प्रेरित करने की जरूरत है, ताकि वे फिर से कांग्रेस के लिए काम करें।
Rahul Gandhi News: 3) बीजेपी को बैठे-बिठाए फायदा
राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी को खुद ही ट्रोल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में मिली हार के लिए कांग्रेस ने अब तक आत्मविश्लेषण क्यों नहीं किया?
'अपने कार्यकर्ता को घोड़ा बता रहे हैं। पहले अपने कार्यकर्ताओं को इंसान तो समझो, घोड़े समझ रहे हो...क्या खड़गे जी के नेतृत्व पे सवाल है क्या है?'राहुल गांधी के बयान से कांग्रेस की कमजोरी उजागर हुई है, जिसका फायदा बीजेपी को भविष्य में मिल सकता है।
Rahul Gandhi: 4) आंतरिक गुटबाजी को बढ़ावा
गुजरात कांग्रेस में पहले से ही गुटबाजी है, और राहुल गांधी के बयान से यह और बढ़ सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के कई जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें शुरू कर दी हैं।
पार्टी के एक नेता के अनुसार, अगर कांग्रेस को बदलना है तो यह काम जमीनी स्तर से शुरू करना होगा, लेकिन पार्टी नेतृत्व खुद ही असमंजस में है। इस स्थिति में पार्टी में और ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
Rahul Gandhi Congress:5) कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ सकता है राहुल का बयान!
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि गुजरात कांग्रेस को पुनर्जीवित करना 2-3 साल का नहीं, बल्कि 50 साल का प्रोजेक्ट है। यह बयान कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक हो सकता है, क्योंकि वे अपने प्रयासों के त्वरित परिणाम की उम्मीद रखते हैं। जब पार्टी के शीर्ष नेता ही लंबे संघर्ष की बात करते हैं, तो इससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर पड़ना स्वाभाविक है।
खुद राहुल गांधी को लेकर बीजेपी उन्हें कांग्रेस में दर्जनों बार लॉन्च करने का तंज कसती रहती है। क्योंकि, वे दो दशक से भी ज्यादा समय से राजनीति में न सिर्फ सक्रिय हैं, बल्कि कांग्रेस में सीधे या परोक्ष रूप से पूरी तरह हावी हैं, लेकिन फिर भी बीजेपी के बढ़ने का ग्राफ रोकना तो दूर, वह कांग्रेस की गिरावट को थामने में भी पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं।












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