GST 2.0: आखिर क्या थी कांग्रेस की सलाह? पवन खेड़ा ने जीएसटी सुधारों के बाद राहुल गांधी को दिया क्रेडिट
जीएसटी (GST) सुधारों पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार को आखिरकार राहुल गांधी की पुरानी सलाह माननी पड़ी, लेकिन इसमें आठ साल क्यों लग गए? जीएसटी काउंसिल की नई घोषणा के बाद कांग्रेस ने इसे देर से लिया गया फैसला बताया है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा- 'जब आखिरकार आपको राहुल गांधी की सलाह माननी ही थी, तो इसमें इतना वक्त क्यों लगाया?'

क्या थी राहुल गांधी की पुरानी मांग?
राहुल गांधी ने 18 अक्टूबर 2016 को ट्वीट कर कहा था कि, जीएसटी (GST) पर 18% से ज़्यादा टैक्स नहीं होना चाहिए। इसका कारण ये बताया गया कि जीएसटी एक इनडायरेक्ट टैक्स है, जो अमीर और गरीब दोनों को प्रभावित करता है।
सस्ती दरों की मांग ताकि गरीबों पर बोझ न पड़े
उन्होंने लिखा कि अगर जीएसटी की दर 18% या उससे कम रखी जाए, तो गरीबों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा कि 2005 से ही कांग्रेस पार्टी ऐसा जीएसटी चाहती थी जो न सिर्फ इंडस्ट्री और ट्रेड के पक्ष में हो बल्कि आम लोगों खासकर गरीबों के लिए भी महंगाई बढ़ाने वाला न हो। यानी जब जीएसटी काउंसिल की चर्चा शुरू हुई, तब उन्होंने इसे दोहराया था।
पी. चिदंबरम का बयान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सुधार आठ साल देर से लिए गए फैसले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अब यह बदलाव सही है, तो फिर पहले गलत डिज़ाइन और ऊंची दरें क्यों लागू की गई थीं?
नई जीएसटी दरें क्या हैं?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक के बाद नई दरें घोषित कीं-
- 5% स्लैब: जरूरी सामान और सेवाएं (खाद्य सामग्री, रसोई का सामान, कृषि उपकरण, मेडिकल किट्स आदि)
- 18% स्लैब: ज्यादातर सामान और सेवाएं (इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान, ऑटो पार्ट्स, टू-व्हीलर्स आदि)
- 40% स्लैब: लग्जरी और 'सिन गुड्स' (तंबाकू, पान मसाला, महंगी गाड़ियां, यॉट्स, हेलिकॉप्टर आदि)
- छूट (Exemptions): शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं, जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कोई टैक्स नहीं।












Click it and Unblock the Notifications