राघव चड्ढा समेत वो 7 सांसद कौन हैं? जो BJP में हुए शामिल, राज्यसभा में अब AAP के कितने MP बचे?
Raghav Chadha vs AAP: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए आज का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे बड़े उथल-पुथल वाला साबित हुआ है। पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने औपचारिक रूप से 'आप' का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं।
यह केवल एक नेता का इस्तीफा नहीं है, बल्कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के अस्तित्व पर मंडराता एक बड़ा संकट है, क्योंकि राघव अकेले नहीं गए हैं। उनके साथ पार्टी के थिंक-टैक कहे जाने वाले संदीप पाठक और राज्यसभा में हाल ही में उपनेता नियुक्त किए गए अशोक मित्तल समेत कुल 7 सांसदों ने पाला बदल लिया है। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि वे "गलत पार्टी में सही व्यक्ति" थे और अब देशहित में बड़े फैसले लेने वाली विचारधारा के साथ जुड़ रहे हैं।

राज्यसभा में AAP की बड़ी टूट, 7 सांसदों का भाजपा में विलय
शुक्रवार को आयोजित एक सनसनीखेज प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने उन तमाम कयासों पर विराम लगा दिया। पिछले कुछ महीनों से उनके और पार्टी के बीच चल रही खटास को लेकर लगाए जा रहे थे और उन्होंने आज AAP छोड़ने का इआलं कर दिया। राघव ने घोषणा की कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद यानी 10 में से 7 उनके साथ हैं और उन्होंने BJP में विलय का फैसला किया है।
इन सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ:
राघव चड्ढा ने जिन सांसदों के अपने साथ जाने का दावा किया है उनमें:
- राघव चड्ढा (Confirm)
- संदीप पाठक (राष्ट्रीय महासचिव, संगठन) (Confirm)
- अशोक मित्तल (हाल ही में बनाए गए राज्यसभा उपनेता) (Confirm)
- स्वाति मालीवाल
- हरभजन सिंह
- राजेंद्र गुप्ता
- विक्रमजीत सिंह साहनी
राघव चड्ढा ने दावा किया है कि स्वाति मालीवाल समेत सभी 7 सांसदों ने आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। दलबदल कानून की पेचीदगियों से बचने के लिए उन्होंने दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार किया है, जिससे अब उनकी सदस्यता पर खतरा कम और BJP का राज्यसभा में पलड़ा भारी हो गया है।
'15 साल जिसे खून से सींचा, वह पार्टी भटक गई'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा काफी भावुक लेकिन तीखे नजर आए। उन्होंने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "जिस आम आदमी पार्टी को मैंने 15 सालों तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह आज अपने मूल आदर्शों और मूल्यों से पूरी तरह भटक गई है। यह पार्टी अब देशहित के लिए नहीं, बल्कि केवल निजी फायदों और भ्रष्टाचार के बचाव के लिए काम कर रही है।"
उन्होंने आगे एक मार्मिक टिप्पणी करते हुए कहा, "मैं इतने वर्षों से सही आदमी था, लेकिन गलत पार्टी में था।" राघव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने और आतंकवाद को जड़ से मिटाने के विजन से प्रभावित होकर यह कदम उठा रहे हैं।
क्यों आई आम आदमी पार्टी के टूटने की नौबत?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह टूट अचानक नहीं हुई। पिछले कुछ महीनों से राघव चड्ढा और पार्टी आलाकमान के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं।
पद से हटाया जाना: कुछ हफ्ते पहले ही 'आप' ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी थी।
बोलने पर पाबंदी: पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से अनुरोध किया था कि राघव को 'आप' के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए, जिससे राघव सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस कर रहे थे।
संदीप पाठक की भूमिका: पार्टी के संगठन को देश भर में खड़ा करने वाले संदीप पाठक का राघव के साथ जाना केजरीवाल के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
अब क्या होगा 'AAP' का भविष्य?
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के पास कुल 10 सांसद थे। राघव चड्ढा के साथ 7 सांसदों के जाने के बाद अब अरविंद केजरीवाल के पाले में संजय सिंह, बलवीर सिंह सींचेवाला सहित केवल 3 सांसद ही बचे हैं।
- संजय सिंह (दिल्ली)
- एन.डी. गुप्ता (दिल्ली)
- बलबीर सिंह सीचेवाल (पंजाब)
विपक्ष में कद घटा: इस टूट के बाद राज्यसभा में 'आप' एक प्रभावी ताकत के रूप में खत्म हो गई है।
संसदीय संकट: 7 सांसदों का एक साथ जाना तकनीकी रूप से 'विलय' की श्रेणी में आ सकता है, जिससे भाजपा की संख्या में इजाफा होगा और 'आप' का सदन में वजूद लगभग खत्म हो जाएगा।
यह घटनाक्रम न केवल दिल्ली और पंजाब की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी चुनावों में विपक्षी एकता के लिए भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।












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