राफेल सौदा: डील की शुरुआत से लेकर अब तक का पूरा घटनाक्रम
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तगड़ा झटका देते हुए कहा है कि वर राफेल मामले में अपने फैसले की समीक्षा करेगा। ऐसे में कोर्ट अब याचिकार्ता की दलीलों को सुनने के लिए एक तारीख तय करेगा। जिसमें राफेल सौदे और उसके मूल्य निर्धारण को लेकर उठाई गई आपत्तियों सहित अन्य पहलुओ पर सुनवाई होगी और फैसला आएगा। राफेल सौदे को लेकर शुरू से लेकर अभी तक क्या क्या हुआ उसे जान लेते हैं।

राफेल डील: शुरू से लेकर अभी तक क्या-क्या हुआ?
- 30 दिसंबर, 2002 : खरीद प्रक्रियाओं को सफल बनाने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) को अपनाया गया।
- 28 अगस्त, 2007 : रक्षा मंत्रालय ने 126 एमएमआरसीए (मीडियम मल्टी रोल कॉम्बेट एयरक्रॉफ्ट) खरीद के प्रस्ताव के लिए प्रपोजल जारी किया।
- 4 सितंबर, 2008 : मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह में रिलायंस एयरोस्पेस टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (RATL) शामिल है।
- मई 2011 : वायु सेना ने राफेल और यूरोफाइटर जेट को शॉर्टलिस्ट किया।
-30 जनवरी, 2012 : डसॉल्ट एविएशन का राफेल विमान के लिए सबसे कम बोली में आगे आया।
- 13 मार्च, 2014 : एचएएल और डसॉल्ट एविएशन के बीच वर्क शेयर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत वे 108 विमानों के लिए क्रमश: 70 फीसदी और 30 फीसदी काम के लिए जिम्मेदार थे।
- 8 अगस्त, 2014 : तब के रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने संसद को बताया कि अनुबंध पर हस्ताक्षर से 3-4 साल में 18 विमान जो तैयार होकर भारत आने की उम्मीद है। शेष 108 विमानों अगले सात-आठ साल में मिल जाएंगे।
- 8अप्रैल, 2015: तत्कालीन विदेश सचिव ने कहा कि डसॉल्ट, MoD और HAL के बीच विस्तृत बातचीत जारी है।
- 10 अप्रैल: फ्रांस से 36 फ्लाई अवे विमान लेने की नई डील की घोषणा हुई।
-26 जनवरी 2016: भारत और फ्रांस ने 36 राफेल विमानों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- सीतंबर 23 : इंटर गौरमेंटल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।
- नवंबर 18 : सरकार संसद में कहती है कि प्रत्येक राफेल विमान की लागत लगभग 670 करोड़ रुपए होगी और अफ्रैल 2022 तक सभी विमान मिल जाएंगे।
-31 दिसंबर, 2016 : डसॉल्ट एविएशन की वार्षिक रिपोर्ट में 36 विमानों के लिए 60,000 करोड़ रुपए की वास्तविक कीमत का खुलासा किया गया है, जो संसद में सरकार की घोषित कीमत से दोगुना है।
- 13 मार्च, 2018 : SC की जनहित याचिका में फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट खरीदने और संसद के समक्ष सौदे में शामिल लागत का खुलासा करने के केंद्र के फैसले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
- 5 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने राफेल फाइटर जेट डील पर रोक लगाने के लिए जनहित याचिका पर सुनवाई की।
-18 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने पीआईएल पर सुनवाई स्थगित करते हुए राफेल फाइटर जेट सौदे पर 10 अक्टूबर तक रोक लगा दी।
-अक्टूबर 8 : सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को राफेल डील को लेकर दायर की गई फ्रेस जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ और केंद्र सरकार से 36 राफेल विमान सौदे को लेकर बंद लिफाफे में जानकारी देने का निर्देश दिया।
- अक्टूबर 10: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीलबंद लिफाफे में राफेल फाइटर जेट सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया का विवरण देने का आदेश दिया।
- अक्टूबर 24: पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी, कार्यकर्ता-वकील प्रशांत भूषण ने SC का रुख किया, राफेल फाइटर जेट सौदे में एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
- अक्टूबर 31: SC ने केंद्र से कहा कि वह 10 दिनों के भीतर 36 राफेल फाइटर जेट्स के मूल्य निर्धारण विवरणों को एक सीलबंद लिफाफे में मुहैया कराए।
- नवंबर 12: केंद्र ने SC को एक सीलबंद लिफाफे में 36 राफेल फाइटर जेट्स की कीमत की जानकारी दी। इसके अलावा यह भी जानकारी दी कि इस सौदे को किस तरह से अंतिम रूप दिया गया।
- नवंबर 14: राफेल सौदे में अदालत की निगरानी वाली जांच की याचिका कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
- दिसंबर 14: सुप्रीम ने कहा कि केंद्र सरकार राफेल डील पर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह जैसा कुछ नहीं मिला है। इसी के साथ कोर्ट ने इस डील की सीबीआई जांच और कथित अनियमितताओं के लिए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
- 10 अप्रैल 2019: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दिया और समीक्षा याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया।
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