राफेल डील: नए दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। राफेल डील मामले में केंद्र की मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय बेंच ने कहा कि राफेल मामले में जो नए दस्तावेज सामने आए हैं, उनकी रोशनी में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी। इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार याचिका पर बाद में विस्तृत सुनवाई होगी। कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख तय करेगा।

केके वेणुगोपाल ने कहा था- ये दस्तावेज वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी

केके वेणुगोपाल ने कहा था- ये दस्तावेज वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी

बता दें कि इसके पहले की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से दलील रखने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि राफेल से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए अपने जवाब में उनका मतलब था कि याचिकाकर्ताओं ने 'वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी' का इस्तेमाल किया है। पहले उन्होंने कहा था कि ये दस्तावेज गायब हो गए थे। जिसको लेकर काफी बवाल मचा था। कांग्रेस ने इसके बाद मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए थे।

सरकार कर रही थी याचिकाओं को खारिज करने की मांग

सरकार कर रही थी याचिकाओं को खारिज करने की मांग

केके वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा था कि कि यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पुनर्विचार याचिका में राफेल डील से संबंधित तीन दस्तावेज पेश किए, जो वास्तविक दस्तावेजों की फोटोकॉपी थे। अटॉर्नी जनरल की इस दलील पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा था।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज किया

इस मामले में केके वेणुगोपाल ने कहा था कि जो दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए, उन्हें विशेषाधिकार प्राप्त है, जिन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत सबूत नहीं माना जा सकता है। इन दस्तावेजों को गोपनीयता के अधिनियम के तहत संरक्षित किया जाता है। इस आधार पर उन्होंने पुनर्विचार याचिका को खारिज करने की मांग की थी। बता दें कि एक लेख में 'द हिंदू' ने कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया था और कहा था कि राफेल सौदे में पीएमओ द्वारा समानांतर बात की जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह सौदा भारत के लिए महंगा हो गया क्योंकि फ्रांस ने बैंक गारंटी देने से इनकार कर दिया। द हिंदू की इस रिपोर्ट के बाद सियासत और गरमा गई थी।

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