बाढ़ प्रभावित जम्मू-कश्मीर में रेडियो बना लोगों का सहारा
जम्मू। बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित जम्मू-कश्मीर में अभी भी लाखों लोग फंसे हुए हैं। अब तक बाढ़ में फंसे करीब 80,000 जिंदगियों को बचाया जा चुका है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान भारतीय सेना और वायुसेना का है। वहीं लोगों के खाना-पानी के लिए जगह जगह पर राहत कैंप लगाए गए हैं।

जम्मू-कश्मीर के लोगों की जान बचाने की क्रम में सेना और सरकार के साथ साथ रेडियो कश्मीर-जम्मू भी सक्रिय कदम उठा रहा है। इस त्रासदी को देखते हुए रेडियो कश्मीर जम्मू ने एक स्पेशल फोन-इन प्रोग्राम 'जीवन रेखा' की शुरूआत की है। जो कि इस परिस्थिति में अपने नाम को सार्थक करती दिख रही है। यह कई बाढ़ में फंसे कई लोगों के लिए मददगार साबित हुई है।
जारी किया गया है हेल्पलाइन नंबर
रेडियो में काम करने वालों के अनुसार, जब से यहां का हेल्पलाइन नंबर बाढ़पीड़ितों के लिए जारी किया गया है, तब से एक मिनट के लिए भी फोन शांत नहीं हुआ है। लाखों लोगों इस नंबर पर कॉल कर रहे हैं। रेडियो कश्मीर-जम्मू ही यहां के लोगों के लिए संचार का माध्यम बन गया है। लोग अपने मैसेज, कॉल , व्हाट्सअप मैसेज यहां भेज रहे हैं, जिसे तुरंत ही ऑनएयर किया जा रहा है। रेडियो के डाइरेक्टर ने कहा कि, हमें पता चला कि प्रशासन भी रेडियो को लगातार मॉनिटर कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी पीड़ितों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
दूरदराज क्षेत्रों में भी पहुंच
आपको बता दें, रेडियो कश्मीर-जम्मू ने सभी कार्यक्रम को स्थगित कर विशेष फोन-इन प्रोग्राम शुरु किया है। रेडियो ने दूरदराज के बाढ़ प्रभावितों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाया। यहां के स्टेशन डाइरेक्टर वीके संब्याल समेत सभी प्रोग्राम पर्सनल ने अपनी अपनी ओर से पूरी मदद की कोशिश की है। इंजीनियर स्टॉफ ने भी फ्रीक्वन्सी को बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश की।
दूसरी ओर, रेडियो कश्मीर-श्रीनगर बाढ़ के पानी बढ़ जाने से जलमग्न हो गया है। लेकिन जीवन रेखा प्रोग्राम को बाकि सभी स्टेशन जैसे लेह, कारगिल, पूंछ, कठुआ केन्द्र पर भी ब्रॉडकास्ट किया जा रहा है। जिससे यह कश्मीर घाटी में दूर दराज में रह रहे लोगों तक भी अपनी पहुंच बना पाए।












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