Rabindranath Tagore Birth Anniversary: रविंद्रनाथ टैगोर के ऐसे विचार जो हमेशा के लिए बदलकर रख देंगे जिंदगी
रविंद्रनाथ टैगोर महान कवि, कहानीकार, गीतकार, संगीतकार और नाटककार थे, जिन्होंने अपने विचारों से लोगों कि जिंदगियां ही बदलकर रख दीं। चलिये बात करते हैं उनके महान विचारों के बारे में।

Rabindranath Tagore: रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती आज यानी 7 मई को पूरे देशभर में मनाई जाती है। कोलकाता में 7 मई को उनका जन्म हुआ था। आज के दिन चलिये बात करते हैं उनके विचारों पर।
1913 में रविंद्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। टैगोर ने करीब 2230 गीतों की रचना की। इसके अलावा ज्यादातर संगीत को भी उन्होंने जन्म दिया। सबसे अहम बात ये कि उन्होंने 1911 में देश के राष्ट्रगान जन-गण-मन की भी रचना की।
रविंद्रनाथ टैगोर के कुछ विचार ऐसे थे, जो इंसान को जीने की एक नई राह दिखा दें। वे कहा करते थे कि हमेशा तर्क करने वाला दिमाग धार वाला वो चाकू है, जो प्रयोग करने वाले के हाथ से ही खून निकाल देता है। ये विचार टैगोर का काफी मशहूर और आजकल की जिंदगी पर एकदम सटीक बैठने वाला है।
'फूल को तोड़कर आप...'
इसके अलावा टैगोर ने प्रेम को लेकर भी कई दफा अपने विचार साझा किए थे। उनका कहना था कि केवल प्रेम की वास्तविकता है, ये महज एक भावना नहीं है। एक एक परम सत्य है जो सृजन के ह्रदय में वास करता है। वहीं वे कहा करते थे कि फूल की पंखुड़ियों को तोड़ कर आप उसकी सुंदरता को इकट्ठा नहीं कर सकते।
हम खतरों का सामना कर सकें
वाकई रविंद्रनाथ टैगोर के वचन इतने अनमोल थे कि अगर मनुष्य इन्हें अपनी जिंदगी में आजमाए तो नकारात्मकता और बुरे विचारों से दूर रहकर अपना विश्वास बढा सकता है। उनका कहना था कि आइये हम यह प्रार्थना ना करें कि हमारे ऊपर खतरे ना आएं, बल्कि ये प्रार्थना करें कि हम उनका निडरता से सामना कर सकें।
सत्य मौन रहता है
टेगौर कहा करते थे कि बर्तन में रखा पानी हमेशा चमकता रहता है और समुद्र का पानी हमेशा ही गहरे रंग का और अस्पष्ट होता है। लघु सत्य के शब्द हमेशा स्पष्ट होते हैं और महान सत्य मौन रहता है। वे कहते थे कि किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है।
दो राष्ट्रगानों के रचयिता टैगोर
बताते चलें कि रविंद्रनाथ टैगोर का जन्म सात मई साल 1861 को कोलकाता में हुआ था। वहीं टैगोर की मृत्यु साल 1913 में हुई थी। सालों तक कोमा में रहने के बाद टैगोर ने दुनिया को अलविदा कहा था। वे अकेले ऐसे कवि हैं, जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। जन गण मन के अलावा बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला के भी वे रचयिता है।












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