पुरी स्वर्गद्वार में चमत्कार: चिता पर लेटी 'मुर्दा' औरत अचानक हो गई जिंदा! डॉक्टरों की उड़ी हवाइयां
Puri Swargadwar Miracle: ओडिशा की तीर्थ नगरी पुरी के स्वर्गद्वार श्मशान घाट पर सोमवार (15 सितंबर) को एक हैरान करने वाली घटना घटी, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला पी. लक्ष्मी को मृत समझकर उनके परिवार ने अंतिम संस्कार की सभी तैयारियां कर ली थीं, लेकिन चिता पर चढ़ने से महज कुछ मिनट पहले वह जीवित पाई गईं।
आंध्र प्रदेश की रहने वाली यह महिला गंभीर हालत में हैं, और डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। यह घटना न केवल चिकित्सा विज्ञान के लिए सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है।

Woman Alive Before Cremation: क्या थी पूरी घटना? परिवार का दर्दनाक अनुभव
पी. लक्ष्मी आंध्र प्रदेश से ओडिशा के गंजम जिले के पोलासारा इलाके में अपने दामाद के घर गई हुई थीं। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। एक परिवारजन धर्म सेठी ने बताया, 'महिला ने अपनी आंखें नहीं खोलीं और सांस लेने का कोई लक्षण भी नजर नहीं आया। हमने उन्हें मृत मान लिया और इलाके के अन्य लोगों को सूचना दे दी। शव को पुरी के स्वर्गद्वार श्मशान घाट ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था की गई।' परिवार अंतिम संस्कार की रस्में निभाने में जुटा था, लेकिन तभी एक चमत्कारिक मोड़ आ गया।
स्वर्गद्वार श्मशान घाट के प्रबंधक ब्रज किशोर साहू ने घटना का विवरण देते हुए कहा, 'दाह संस्कार के लिए तीन जरूरी दस्तावेज होते हैं - मृतक और आवेदक का आधार कार्ड, साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र। परिवार मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दिखा सका। हम स्थानीय सरपंच या अधिकारियों से यह लाने को कह रहे थे, तभी हमारे एक सुरक्षा गार्ड ने नोटिस किया कि बुजुर्ग महिला की सांसें चल रही हैं।' यह खोज तब हुई जब चिता पर चढ़ाने की तैयारी हो रही थी। कर्मचारियों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और लक्ष्मी को पुरी अस्पताल पहुंचाया।
डॉक्टरों की रिपोर्ट: दिल-गुर्दे ठीक, लेकिन दिमाग की समस्या
पुरी अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। एक डॉक्टर ने कहा, 'उनका दिल और गुर्दे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन दिमाग ठीक से फंक्शन नहीं कर रहा। यह कैटाटोनिक स्टेट जैसी स्थिति हो सकती है, जहां व्यक्ति को मृत समझ लिया जाता है।' डॉक्टरों का मानना है कि समय पर इसकी पहचान न होने से ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। फिलहाल, लक्ष्मी को विशेष निगरानी में रखा गया है, और परिवार ने राहत की सांस ली है।
क्यों हुआ ऐसा? विशेषज्ञों के अनुसार संभावित कारण
इस तरह की घटनाएं दुर्लभ हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों में कमजोर हृदय गति या गहरी कोमा जैसी स्थिति के कारण कभी-कभी सांस लेना रुक सा लग जाता है। ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी भूल न हो। स्वर्गद्वार श्मशान घाट के कर्मचारियों की सतर्कता ने एक जान बचाई, जिसकी तारीफ हो रही है। यह घटना पुरी की पवित्र भूमि पर एक चमत्कार की तरह देखी जा रही है। क्या यह ईश्वरीय कृपा है या चिकित्सा लापरवाही? कमेंट्स में बताएं...
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