कोयला संकट का पंजाब पर सबसे ज्यादा असर, जानिए उत्तर भारत के दूसरे राज्यों का हाल
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। मौजूदा कोयला संकट का सबसे ज्यादा उत्तर भारत में पड़ा है। इसमें पंजाब इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित है और यह राज्य उत्तर भारत में सबसे ज्यादा बिजली की कमी से जूझ रहा है। 11 अक्टूबर यानि सोमवार को राज्य में लगभग 2300 मेगावाट बिजली की कमी थी जिसके चलते राज्य भर में भारी पावर कट रहा। सोमवार की तरह ही मंगलवार को भी प्रदेश भर में 4 से 7 घंटे का पावर कट रहा।

उत्तरी क्षेत्रीय लोड डिस्पैच सेंटर (एनआरएलडीसी) ने जो सोमवार की दैनिक संचालन रिपोर्ट जारी की है उसके अनुसार पंजाब में 11,046 मेगावाट की मांग के मुकाबले 8751 मेगावाट बिजली की ही आपूर्ति की जा सकी। इस तरह से 2295 मेगावाट की कमी रही जिसे बिजली कटौती में बदल दिया गया।
पंजाब को अपने सरकारी और निजी थर्मल में दैनिक आधार पर कोयला मिल रहा है और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के सीएमडी ए वेणुप्रसाद के अनुसार स्थिति अभी भी गंभीर है।
हरियाणा और राजस्थान में हल्की कमी
वहीं पड़ोसी हरियाणा में 8319 मेगावाट की बिजली की आपूर्ति की गई जो कि 8382 अधिकतम मेगावाट के मुकाबले सिर्फ 63 मेगावाट की कमी रही।
राजस्थान में अधिकतम मांग 12,534 मेगावाट रही और राज्य में 12,261 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो पाई। इस तरह राजस्थान में मांग के मुकाबले 272 मेगावाट की कमी रही।
दिल्ली में नहीं रही कमी
एनआरएलडीसी के डाटा के मुताबिक दिल्ली में 11 अक्टूबर को मांग के मुताबिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। दिल्ली में सोमवार को 4683 मेगावाट की मांग थी जिसे दिन भर में पूरा कर लिया गया। वहीं सबसे बड़ी आबादी वाली प्रदेश में सोमवार को बिजली की मांग 19,843 मेगावाट रही और राज्य में 18,973 की आपूर्ति की जा सकी। इस तरह राज्य में 870 मेगावाट बिजली की कमी रही।
वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में दिन भर में 2052 मेगावाट बिजली की मांग रही जबकि 1862 मेगावाट की ही आपूर्ति की जा सकी।
हिमाचल में कोई कमी नहीं थी और राज्य ने 1551 मेगावाट की मांग को पूरा किया जबकि जम्मू और कश्मीर में कुल 200 मेगावाट की कमी थी।












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