Punjab: पंचायत का फरमान- किसान आंदोलन में जाना जरूरी, नहीं तो परिवार का होगा सामाजिक बहिष्कार
Punjab Hindi News: पिछले 66 दिनों से दिल्ली से लगती सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान शुरू से ही नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच 26 जनवरी को आंदोलन में नया मोड़ आया, जब बड़ी संख्या में अराजक तत्व लाल किले पर पहुंच गए और वहां पर जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद कई संगठनों ने आंदोलन से खुद को अलग कर लिया और बड़ी संख्या में किसान वापस घरों को चले गए। आंदोलन खत्म होता देख भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत भावुक हो गए, जिसके बाद अब फिर से बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शनस्थलों पर पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही पंजाब की एक पंचायत ने अजीबो-गरीब फरमान सुनाया है।
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दरअसल बठिंडा में विर्क खुर्द (Virk Khurd) ग्राम पंचायत ने किसान आंदोलन को लेकर एक बैठक की। जिसमें फैसला लिया गया कि हर परिवार से एक-एक सदस्य को किसान आंदोलन में भेजा जाएगा, जो वहां जाकर नए कृषि कानूनों का विरोध करेंगे। साथ ही उनके लिए प्रदर्शनस्थल पर कम से कम एक हफ्ते रहना अनिवार्य है। वहीं अगर किसी परिवार ने ऐसा करने से मना किया तो उसके ऊपर 1500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर उसने जुर्माने की राशि देने से मना कर दिया, तो उसका समाज से सामूहिक रूप से बहिष्कार किया जाएगा। वहीं गांव की सरपंच मंजीत कौर ने खुद इस फैसले को मीडिया के सामने आकर बताया।
आज किसानों का उपवास
किसान आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सद्भावना दिवस मना रहे हैं। जिसके तहत वो पूरा दिन उपवास रखेंगे। साथ ही राकेश टिकैत के भावुक होने के बाद यूपी के कई जिलों में महापंचायत हुई। जिसके बाद यूपी के किसानों ने आज दिल्ली कूच का ऐलान किया है। वहीं दूसरी ओर यूपी सरकार ने भी किसानों को गाजीपुर बॉर्डर खाली करने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया। राकेश टिकैत के मुताबिक जब तक नए कानून वापस नहीं होते वो गांव नहीं जाएंगे।












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