किसान आंदोलन के बीच पंजाब में निकाय चुनाव, राजनीतिक दलों के लिए मुश्किल परीक्षा, चौंका सकती है ये पार्टी
नई दिल्ली। Punjab Municipal elections: कृषि कानूनों के खिलाफ तकरीबन दो महीने से अधिक समय से पंजाब के किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसान तीनों ही कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। किसान आंदोलन के बीच पंजाब में स्थानीय निकाय के चुनाव होने जा रहे हैं, ऐसे में प्रदेश में राजनीतिक दलों के लिए इन चुनावों में अपनी स्थिति को मजबूत करना काफी चुनौतीपूर्ण साबित होने जा रहा है। माना जा रहा है कि निकाय चुनाव इन कृषि कानूनों को लेकर जनता का रेफ्रेंडम साबित होगा।

अकाल-कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़े
रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में होने वाले आगामी निकाय चुनाव के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के साथ बादल जलालाबाद स्थित एसडीएम ऑफिस जा रहे थे, तभी कांग्रेस और अकाली क कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और इस दौरान दोनों ही गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस झड़प का वीडियो भी सामने आया जिसमे देखा जा सकता है कि कुछ लोग सफेद रंग की गाड़ी पर हमला कर रहे हैं, पत्थर फेंक रहे हैं।

14 फरवरी को लिटमस टेस्ट
प्रदेश में 14 फरवरी को म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव होने हैं। ऐसे में ये निकाय चुनाव किसानों के आंदोलन के बाद राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट साबित होने जा रहा है। आठ में से पांच निकाय राजनीति और कृषि क्षेत्र के लिहाज से काफी अहम हैं, जोकि मुख्य रूप से मालवा में आते हैं। ये भटिंडा, एसएस नगर, मोगा, मोगा और अमृतसर हैं। हालांकि ये शहरी क्षेत्र हैं लेकिन यहां अधिकतर वोटर कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं और सीधे और अपरोक्ष तौर पर ये लोग कृषि से जुड़े हैं।

वोटर्स को लेकर राजनीतिक दलों में संशय
पिछले निकाय चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी और पार्टी को उम्मीद है कि वो एक बार फिर से उसी इतिहास को दोहराएगी, लेकिन लगातार चल रहे किसानों के आंदोलन की वजह से कांग्रेस पार्टी के लिए यह राह आसान नहीं होने वाली है। किसान आंदोलन में किसान नेताओं ने राजनीतिक दलों को अपने आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया है, ऐसे में निकाय चुनाव के दौरान किसान किन्हें वोट देते हैं इसपर अभी स्थिति साफ नहीं है।

आप चौंका सकती है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी एक ऐसे दल के रूप में सामने जरूर आ सकती है जो हर किसी को चौंका सकती है। संभव है कि आम आदमी पार्टी प्रचार के दौरान अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली अमरिंदर सिंह सरकार पर निशाना साध सकती है कि किसानों को कृषि कानूनों से बचाने के लिए सरकार ने कुछ नही किया। पंजाब आप के चीफ भगवंत मान का दावा है कि अगर कांग्रेस चाहती तो इन लोगों ने शुरुआत में इन कानूनों को रोक दिया होता, ये लोग इन आरोपों को खारिज कर सकते हैं लेकिन लोग सच्चाई जानते हैं।












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