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केजरीवाल की नीति पर हरभजन ने उठाए सवाल? दिल्ली हार के बाद पंजाब 'आप' में नशा विरोधी अभियान पर घमासान

Punjab drug crisis: दिल्ली चुनावों में हार के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए नशा विरोधी अभियान पर जोर डालना शुरू किया है। पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है, और केजरीवाल ने इसे खत्म करने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का दावा किया है।

लेकिन इस अभियान पर पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने सवाल उठा दिए हैं। हरभजन ड्रग्स माफियाओं के घरों पर बुलडोजर एक्शन का विरोध करते हुए कह रहे हैं कि यह सही विकल्प नहीं है।

punjab drug crisis

Arvind Kejriwal Punjab: नशे के खिलाफ बुलडोजर एक्शन और पंजाब सरकार का दावा

आप सुप्रीमो केजरीवाल दिल्ली चुनाव हारने के बाद लगातार पंजाब की गतिविधियों पर गौर फरमा रहे हैं। इसी दौरान पंजाब सरकार ने 1 मार्च से ड्रग्स माफिया के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिस प्रशासन को तीन महीने में ड्रग्स कारोबार खत्म करने का अल्टीमेटम दे रखा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब तक 1,651 केस दर्ज किए जा चुके हैं, 2,575 ड्रग्स तस्करों की गिरफ्तारी हुई है, और 1,322 किलो नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।

इसके अलावा, सरकार ने ड्रग्स माफियाओं की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की नीति अपनाई है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि ड्रग्स कारोबारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

AAP anti-drug campaign: हरभजन सिंह का विरोध: क्या बुलडोजर नीति सही है?

पूर्व क्रिकेटर और आप नेता हरभजन सिंह ने अपनी ही सरकार के इस अभियान में अपनाए गए तरीके पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि कोई व्यक्ति नशे का कारोबार करता है, इसलिए उसका घर गिरा देना सही विकल्प नहीं है। हमें यह समझना होगा कि किसी ने घर कैसे बनवाया होगा।'

हरभजन सिंह का यह बयान न केवल पंजाब सरकार की नीति पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आप पार्टी के भीतर ही इस मुद्दे पर एकराय नहीं है।

Punjab drug crisis: केजरीवाल की रणनीति: राजनीति या वास्तविक समाधान?

केजरीवाल ने बीते रविवार को जब अमृतसर दौरे के मौके पर नशे के खिलाफ इस युद्ध का ऐलान किया था, तो तभी यह सवाल उठने लगा कि क्या यह वास्तविक समाधान है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति?

1.दिल्ली हार के बाद पंजाब पर फोकस: दिल्ली विधानसभा चुनावों में हार के बाद आप नेतृत्व पंजाब जैसे अपने नए गढ़ को बचाने की कोशिश कर रहा है। यह ड्रग्स विरोधी अभियान एक बड़े सामाजिक मुद्दे पर सरकार की सक्रियता को दिखाने का प्रयास है।

क्योंकि, 2022 के चुनाव अभियान के दौरान सरकार बनते ही इसके खिलाफ एक्शन लेने का वादा खुद केजरीवाल ने किया था, लेकिन अब वे खुद मान रहे हैं कि इसमें तीन साल की देरी हुई।

2.भ्रष्टाचार और पुलिस प्रशासन की भूमिका: ड्रग्स तस्करी को खत्म करने में केवल बुलडोजर कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो सकती। भ्रष्टाचार, पुलिस और राजनीतिक संरक्षण जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। क्योंकि, यह समस्या एक दिन में खड़ी नहीं हुई है और ना ही बिना संरक्षण के ड्रग्स माफिया इतने शक्तिशाली हुए हैं।

Bulldozer action Punjab: पार्टी में अंदरूनी असहमति: हरभजन सिंह बनाम पार्टी लाइन

हरभजन सिंह का बयान यह दिखाता है कि आप पार्टी में भी इस मुद्दे पर मतभेद हैं। क्योंकि, दिल्ली के पूर्व विधायक और आप के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने कहा है कि हरभजन सिंह को पार्टी लाइन के खिलाफ जाने से बचना चाहिए।

AAP Punjab: भविष्य की राह: क्या यह रणनीति सफल होगी?

केजरीवाल और भगवंत मान सरकार की यह नीति निश्चित रूप से नशे की समस्या के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है, लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि:

क्या सरकार सिर्फ इमारतें गिराने तक सीमित रहती है या ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने की ठोस नीति बनाई जाती है? क्योंकि, इससे पहले 2017 में अकाली-बीजेपी सरकार को हटाकर कांग्रेस की सरकार भी इसी वादे के साथ बनी थी कि पंजाब को ड्रग्स की समस्या से छुटकारा दिलाया जाएगा। तब 'उड़ता पंजाब' नाम की एक फिल्म ने भी तत्कालीन सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

क्या निर्दोष लोगों को इस बुलडोजर मुहिम की चपेट में आने से बचाने के लिए उचित जांच प्रक्रिया अपनाई जाएगी?

क्या यह महज राजनीतिक स्टंट बनकर रह जाएगा या वास्तव में पंजाब को नशा मुक्त करने की दिशा में सार्थक कदम साबित होगा?

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