'मौसी के साथ रहेगा नाबालिग', पुणे पोर्श कांड में 17 वर्षीय आरोपी को मिली जमानत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा?
Pune Porsche crash: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे पोर्शे कांड में 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी को जमानत दे दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि नाबालिग को हिरासत में रखना गैरकानूनी है। मंगलवार 25 जून को बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाबालिग आरोपी को सुधार गृह से रिहा करने का आदेश दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच नाबालिग को जमानत देते हुए कहा कि, जो हादसा हुआ, वो दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम में नहीं रखा जा सकता है। नाबालिग अब अपनी मौसी के साथ उनकी निगरानी में रहेगा।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा-आरोपी की उम्र पर विचार नहीं किया गया था
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि, नाबालिग के माता-पिता और दादा भी जेल में बंद हैं, इसलिए हम नाबालिग की कस्टडी उनकी मौसी को देते हैं और नाबालिग अब अपनी मौसी के साथ ही रहेगा।
हाई कोर्ट ने कहा, "आरोपी की उम्र पर विचार नहीं किया गया। सीसीएल (Child in Conflict with Law) 18 वर्ष से कम उम्र का है। उसकी उम्र पर विचार किए जाने की जरूरत है।"
नाबालिग आरोपी की जमानत के लिए उसकी मौसी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हैबियस कॉर्पस की एक रिट दायर की थी। बता दें कि हैबियस कॉर्पस की रिट जुवेनाइल जस्टिस एक्ट पर आधारित है।
What is Pune Porsche crash: पुणे पोर्श कांड क्या है?
⚫️ 19 मई 2024 की सुबह कथित तौर पर शराब के नशे में धुत 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी काफी स्पीड से पोर्श कार चला रहा था। इसी दौरान उसने पुणे के कल्याणी नगर में मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा को टक्कर मार दी थी। जिसमें अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई।
⚫️ इस मामले के बाद नाबालिग को उसी दिन किशोर न्याय बोर्ड ने जमानत दे दी थी और उसे अपने माता-पिता की देखरेख में रहने का आदेश दिया था। कोर्ट ने जमानत देते वक्त ये शर्त रखी थी कि नाबालिग आरोपी सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखेगा और ट्रैफिक पुलिस के साथ वक्त बिताएगा।
⚫️ हालांकि ये जमानत वाली बाद जब मीडिया से प्रमुखता से उछाली तो फिर से पुलिस ने बोर्ड के समक्ष एक आवेदन दायर किया, जिसमें जमानत के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। जिसके बाद 22 मई 2024 को बालिग आरोपी को हिरासत में लेने और उसे बाल सुधार गृह में भेजने का आदेश दिया गया था। इस केस में पुलिस की लापरवाही की भी बात सामने आई थी।












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