सुंदर बच्चियों से नफरत, एकादशी की रातें और पानी में डुबोकर कत्ल–साइको किलर चाची की कहानी हैरान करने वाली
Panipat psycho killer Aunty Poonam: हरियाणा के पानीपत जिले के नौल्था और सिवाह गांव से निकली यह कहानी अब सिर्फ एक क्राइम केस नहीं रह गई है, बल्कि इंसानी सोच के सबसे खौफनाक चेहरे को भी सामने ला रही है। पढ़ी-लिखी, शांत और सामान्य दिखने वाली महिला पूनम, जिसने कथित तौर पर दो साल में चार मासूम बच्चों की हत्या की, अब पुलिस पूछताछ में ऐसे खुलासे कर रही है, जिन्होंने जांच अधिकारियों तक को सन्न कर दिया है। इस केस में अब एक नया एंगल भी सामने आया है कि वह एक खास दिन ही बच्चों को निशाना बनाती थी।
पढ़ी-लिखी महिला से साइको किलर बनने तक का सफर
32 साल की पूनम MA और B.Ed पास बताई जा रही है। साल 2019 में उसकी शादी हुई और 2021 में उसका बेटा शुभम पैदा हुआ। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था। पति का छोटा कारोबार था, घर में सास-ससुर थे, लेकिन भीतर ही भीतर रिश्तों में तनाव चल रहा था। पड़ोसी बताते हैं कि वह कम बोलती थी और खुद में ही रहती थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इसी खामोशी के भीतर एक खतरनाक सोच पल रही है।

पहली हत्या और अपने ही बेटे की कुर्बानी
13 जनवरी 2023 को उसकी ननद की 11 साल की बेटी इशिका घर आई थी। घर में चहल-पहल थी। उसी दिन इशिका को पानी के हौद में डुबोकर मार दिया गया। यह हत्या दबाने के लिए पूनम ने ऐसा कदम उठाया, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने अपने ही तीन साल के बेटे शुभम को भी मार डाला, ताकि दोनों मौतों को हादसे का रूप दिया जा सके। परिवार ने मां की कहानी पर भरोसा कर लिया और दोनों मौतें हादसे मान ली गईं।
तंबू में सोती बच्ची और पानी के टैंक में मौत
18 अगस्त 2025 को पूनम अपने मायके सिवाह गांव गई थी। रात में वह अपनी रिश्तेदारी की बच्ची जिया के साथ सोई। सुबह जिया गायब मिली और बाद में उसका शव घर के पानी के टैंक में मिला। ताऊ सुरेंद्र को तभी शक हुआ था कि बच्ची की मौत हादसा नहीं है। उन्होंने आरोप भी लगाया, लेकिन पूनम ने रोना-धोना मचाकर और आत्महत्या की धमकी देकर मामला वहीं दबा दिया। लोक-लाज और बदनामी के डर से पुलिस तक बात नहीं पहुंची।
एकादशी कनेक्शन और तांत्रिक शक
अब जब सारी कड़ियां जुड़ने लगीं तो यह बात भी सामने आई कि जिन तीन हत्याओं की तारीखें सामने आई हैं, वे एकादशी के दिन की थीं। सुरेंद्र का कहना है कि सभी हत्याओं का तरीका भी एक-सा था। इसी वजह से उन्होंने तांत्रिक क्रिया या किसी अंधविश्वासी सोच की आशंका भी जताई है। हालांकि पुलिस इस एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है, लेकिन इस संयोग ने पूरे केस को रहस्यमय बना दिया है।
विधि की हत्या ने खोले सारे राज
1 दिसंबर 2025 को छह साल की विधि की हत्या ने इस पूरी कहानी का असली चेहरा सामने रख दिया। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। शोर-शराबे के बीच पूनम विधि को स्टोर रूम में ले गई। वहां टब में भरे पानी में बच्ची को तब तक डुबोए रखा, जब तक उसकी सांसें टूट नहीं गईं। बाद में वह मुस्कुराती हुई बाहर आई ताकि किसी को शक न हो। लेकिन इस बार पुलिस को शक हो गया और पूछताछ शुरू हुई। यहीं से पिछले सभी कत्लों की परतें भी खुलती चली गईं।
सुंदर बच्चियों से नफरत का कबूलनामा
पुलिस पूछताछ में पूनम ने जो बात कही, उसने सबको चौंका दिया। उसने बताया कि उसे सुंदर बच्चियों से अजीब-सी नफरत हो जाती थी। यही नफरत धीरे-धीरे हिंसा में बदल गई। पानीपत पुलिस के मुताबिक, उसके व्यवहार में सायकोपैथ जैसी प्रवृत्तियां साफ दिख रही हैं। फिलहाल उसकी मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है।
पीड़ित परिवारों की टूटी जिंदगी
विधि की मां आज पूनम के दो साल के बेटे को गोद में लेकर पाल रही है। जिस मां ने अपनी बेटी खोई, वही अब कातिल का बच्चा संभाल रही है। उधर पूनम की मां सुनीता देवी का कहना है कि शादी से पहले उनकी बेटी बिल्कुल सामान्य थी। जेठ संदीप बताते हैं कि कई बार उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आता था। एक बार उसने विधि पर गर्म चाय भी फेंकी थी, जिसे तब हादसा समझ लिया गया।
मौत की सजा की मांग और आगे की जांच
चचेरे भाई सुरेंद्र ने प्रशासन से मांग की है कि पूनम को फांसी की सजा दी जाए। उनका कहना है कि अगर वह जिंदा रही तो भविष्य में और बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक जांच चल रही है। यह साफ होता जा रहा है कि यह सिर्फ एक क्राइम नहीं, बल्कि एक बीमार मानसिकता का भयानक नमूना है।












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