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PSLV-C62 Launch: लॉन्च के दौरान तकनीकी गड़बड़ी से ISRO का मिशन असफल, क्यों अहम था EOS-N1 सैटेलाइट?

PSLV-C62 Launch: भारत अपना 2026 का अंतरिक्ष कैलेंडर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ शुरू किया लेकिन लॉन्च के दौरान रॉकेट पॉथ में गड़बड़ी होने से मिशन सफल नहीं हो पाया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सोमवार, 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 मिशन पूरी तरह तैयार से लॉन्च किया गया लेकिन मिशन सफल नहीं रहा।

यह लॉन्च आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था। आइए विस्तार से जानते हैं क्या है इसरो का यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, भारत के लिए क्यों है यह खास...

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उड़ान के दौरान गड़बड़ी, मिशन सफल नहीं हो सका- इसरो प्रमुख

इसरो (ISRO) के प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन के लॉन्च के दौरान रॉकेट अपने तय रास्ते से थोड़ा भटक गया, जिसके कारण मिशन योजना के अनुसार आगे नहीं बढ़ पाया।उन्होंने आसान शब्दों में कहा कि रॉकेट को जिस दिशा और ऊंचाई में जाना था, वह वैसा नहीं कर पाया, इसलिए मिशन को पूरी तरह सफल नहीं माना जा रहा है।

इसरो प्रमुख के मुताबिक, देशभर में मौजूद सभी ग्राउंड स्टेशनों से मिले डेटा की जांच की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि तकनीकी चूक कहां हुई।

इस मिशन के लिए 11 जनवरी से ही काउंटडाउन शुरू हो गया ता जिसकी कुल अवधि 22 घंटे 30 मिनट थी। यह लॉन्च ISRO के लिए खास माना जा रहा था, क्योंकि PSLV का पिछला मिशन 2025 में तकनीकी कारणों से रोक दिया गया था।

PSLV-C62 मिशन की खासियत क्या है?

इस मिशन के तहत ISRO अपने भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के जरिए एक अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट के साथ-साथ 14 सह-यात्री (को-पैसेंजर) उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा। यह मिशन न सिर्फ भारत की अंतरिक्ष क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती साख को भी मजबूत करता है।

PSLV-C62 के जरिए भेजा जाने वाला अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट देश के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह उपग्रह करीब 260 टन वजनी PSLV-C62 रॉकेट इस मिशन में EOS-N1 अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट, जिसे 'अन्वेषा' भी कहा जाता है, को पृथ्वी से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करेगा। यह सैटेलाइट पृथ्वी अवलोकन,कृषि और फसल निगरानी,जल संसाधन प्रबंधन,आपदा प्रबंधन, और पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी में अहम भूमिका निभाएगा।

14 को-पैसेंजर सैटेलाइट भी होंगे लॉन्च

मुख्य उपग्रह के अलावा इस मिशन में 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट भी शामिल हैं। ये उपग्रह भारत और विदेशों के ग्राहकों के हैं, जिन्हें ISRO की व्यावसायिक इकाई न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए लॉन्च किया जा रहा है। लिफ्ट-ऑफ के बाद 17 मिनट के भीतर पहले EOS-N1 और फिर क्रमवार सभी को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को उनकी तय कक्षाओं में छोड़ा जाएगा।

स्पेनिश स्टार्टअप के री-एंट्री कैप्सूल का प्रदर्शन

PSLV-C62 मिशन को और भी खास बनाता है इसका इन-ऑर्बिट डिमॉन्स्ट्रेशन। लॉन्च के दो घंटे से अधिक समय बाद, ISRO वैज्ञानिक रॉकेट के चौथे चरण (PS4) को दोबारा चालू करेंगे। इस दौरान करीब 25 किलोग्राम वजनी 'Kestrel Initial Technology Demonstrator' री-एंट्री कैप्सूल को डी-बूस्ट कर पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कराया जाएगा। उम्मीद है कि PS4 स्टेज और यह कैप्सूल दक्षिणी प्रशांत महासागर (South Pacific Ocean) में सुरक्षित रूप से स्प्लैशडाउन करेंगे।

PSLV: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की रीढ़

अब तक PSLV 63 सफल मिशन पूरे कर चुका है। इसी रॉकेट ने चंद्रयान-1, मंगलयान (Mars Orbiter Mission), और आदित्य-L1 जैसे मिशनों को अंतरिक्ष में पहुंचाया है। PSLV-C62 इसका 64वां मिशन होगा, जो एक बार फिर साबित करेगा कि PSLV भारत के स्पेस लॉन्च प्रोग्राम की रीढ़ है।

यह मिशन ISRO की हालिया बड़ी उपलब्धि के बाद आ रहा है, जब LVM3 रॉकेट ने AST SpaceMobile के BlueBird Block-2 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। वह LVM3 द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट में भेजा गया अब तक का सबसे भारी पेलोड था।

2026 की मजबूत शुरुआत

PSLV-C62 मिशन के साथ भारत ने 2026 की अंतरिक्ष यात्रा की मजबूत और आत्मविश्वास भरी शुरुआत कर दी है। यह लॉन्च न केवल तकनीकी दृष्टि से अहम है, बल्कि भारत को एक विश्वसनीय और अग्रणी अंतरिक्ष शक्ति के रूप में और मजबूत करता है।

PSLV-C62 मिशन भारत की तकनीकी दक्षता, आत्मनिर्भरता और "मेक इन इंडिया" विज़न का प्रतीक है। यह लॉन्च न सिर्फ वैज्ञानिक समुदाय के लिए, बल्कि देशवासियों के लिए भी गर्व का क्षण होगा। श्रीहरिकोटा से होने वाला यह प्रक्षेपण एक बार फिर साबित करेगा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्पेस पावर के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

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