लोकसभा चुनाव 2019: उज्जैन लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की वाली उज्जैन लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के प्रो. चिंतामणि मालवीय हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के धुरंधर नेता प्रेमचंद गुड्डू को 30,96,63 वोटों से हराया था। इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर आप थी, उस साल यहां कुल वोटरों की संख्या 15 लाख 25 हजार 481 थी, जिसमें से मात्र 10 लाख 16 हजार 405 मतदाताओं ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 5 लाख 71 हजार 525 और महिलाओं की संख्या 4 लाख 44 हजार 880 थी। उज्जैन की 86 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू धर्म में और 11 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में यकीन रखते हैं।

उज्जैन लोकसभा सीट का इतिहास
एमपी की उज्जैन लोकसभा सीट 1967 से आरक्षित है, इस क्षेत्र में नागदा-खाचरौद, महिदपुर, तराना, बडऩगर, घट्टिया, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण और आलोट सहित कुल आठ विधानसभा आती है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट पर 1967 और 1971 के चुनावों में भारतीय जनसंघ के प्रत्याशियों को जीत मिली थी तो वहीं 1977 के चुनाव में भारतीय लोक दल के हुकुमचंद कछवाय यहां से जीते थे । 1980 से भाजपा ने अपने पैर यहां जमाना शुरू किए, इस सीट पर डॉ. सत्यनारायण जटिया पहली बार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले सांसद का चुनाव लड़े और जीते। हालांकि 1984 के अगले ही चुनाव में वे कांग्रेस के सत्यनारायण पंवार से हार गए। इसके बाद कांग्रेस 1989 से लेकर 2004 तक हुए सभी आम चुनाव में इस सीट पर खाता नहीं खोल पाई। डा. जटिया एक के बाद एक हर चुनाव दावे के साथ जीतते चले गए हालांकि साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस को यहां सफलता मिली लेकिन साल 2014 के चुनाव में एक बार फिर से यहां कमल खिला और चिंतामणि मालवीय यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे।
उज्जैन, परिचय- प्रमुख बातें-
महाकाल की नगरी उज्जैन विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी हुआ करती थी। इसे कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां हर 12 वर्ष पर सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल का दर्शन करने के लिए यहां हर साल लाखों की संख्या में लोग आते हैं । मंदिरों की नगरी उज्नैन की जनसंख्या लगभग 22 लाख 90 हजार 606 है, जिसमें से 63 प्रतिशत आबादी गांवों में और 36 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं, यह मध्य प्रदेश का पांचवा सबसे बड़ा शहर है।
चिंतामणि मालवीय का लोकसभा में प्रदर्शन
दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक उज्जैन से सांसद चिंतामणि मालवीय की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 77 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 29 डिबेट में हिस्सा लिया है और 204 प्रश्न पूछे हैं।
उज्जैन में भाजपा का किला ध्वस्त करना आसान नहीं है लेकिन फिर भी कांग्रेस इस सीट को इस बार जीतने के लिए एड़ी-चोटी का दम लगाएगी तो वहीं भाजपा की पूरी कोशिश इस सीट को अपने पास बचाकर रखने की होगी, हालांकि उसके लिए यह कर पाना बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इस वक्त राज्य में कांग्रेस की सरकार है और विधानसभा चुनावों के नतीजे उसके पक्ष में नहीं आए हैं, कहना गलत ना होगा कि इस सीट पर लड़ाई रोमांचक हो गई है जिसमें जीतेगा वो ही जिसे उज्जैनवासियों का साथ और प्यार मिलेगा और वो किसके साथ हैं, यह तो चुनावी परिणाम ही बताएंगे।












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