लोकसभा चुनाव 2019: तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। तिरुवनंतपुर लोकसभा सीट की बात करें तो यहां से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के नेता शशि थरूर सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में शशि थरूर ने बीजेपी उम्मीदवार ओ. राजागोपाल को 15 हजार 470 वोटों से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में शशि थरूर को 2 लाख 97 हजार 806 वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर रहे बीजेपी उम्मीदवार ओ. राजागोपाल को 2 लाख 82 हजार 336 वोट मिले थे। इस सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार बेनेट अब्राहम तीसरे नंबर पर रहे थे, उन्हें 2 लाख 48 हजार 941 वोट मिले थे। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अजित जॉय को महज 14 हजार 153 वोट मिले थे। इस सीट 3 हजार 346 वोट नोटा (NOTA) को भी गए थे। 2014 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 8 लाख 73 हजार 439 वोट पड़े थे, यानी करीब 69 फीसदी मतदान यहां हुआ था। वोट डालने वालों में 4 लाख 34 हजार 623 पुरुष मतदाता थे, वहीं महिला वोटरों की संख्या पुरुष मतदाताओं से भी ज्यादा 4 लाख 38 हजार 816 थी।

लोकसभा चुनाव 2019: तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट के बारे में जानिए

तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र, केरल की 20 लोकसभा सीटों में से एक है, जो कि तिरुवनंतपुरम जिले में आता है। तिरुवनंतपुरम इस राज्य का सबसे दक्षिणी जिला है और प्रदेश की राजधानी भी है। इसका प्रशासनिक मुख्यालय, तिरुवनंतपुरम शहर है, जिसे त्रिवेंद्रम भी कहा जाता है। वर्तमान में यहां से सांसद शशि थरूर साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव में उतरे थे और जीत दर्ज कर सांसद बने थे। 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो उस समय शशि थरूर को कुल 3 लाख 26 हजार 725 वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर रहे सीपीआई उम्मीदवार पी. रामचंद्रन नायर को को 2 लाख 26 हजार 727 वोट मिले थे। उस चुनाव में तीसरे नंबर बीएसपी रही थी जिसके उम्मीदवार ए. नीलालोहितादसान नाडर को 86 हजार 233 वोट मिले थे। इस तरह से लगातार दूसरी बार शशि थरूर इस लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि 2009 से पहले लोकसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और सीपीआई के बीच ही देखने को मिला है।

तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां कि कुल आबादी 17 लाख 3 हजार 709 है। इसमें 27.83 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में और करीब 72.17 फीसदी लोग शहरी इलाकों में रहते हैं। अगर अनुसूचित जाति की बात करें तो यहां 9.82 फीसदी एससी आबादी है, वहीं अनुसूचित जनजाति (एसटी) करीब 0.45 फीसदी हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं- कझाकुट्टम, तिरुवनंतपुरम, नीमोम, परास्सला, कोवलम, नेयाटिंकारा, वाटीयूरकावु (एससी)। सात विधानसभा क्षेत्रों में से वाटीयूरकावु विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।

तिरुवनंतपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद कांग्रेस नेता डॉ. शशि थरूर की बात करें तो वह पूर्व राजनयिक रह चुके हैं। वर्तमान में, वे विदेशी मामलों में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष का कार्यभार संभाल रहे हैं। 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने के बाद शशि थरूर केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री बने थे। 2009 से 2010 तक उन्होंने विदेश राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली फिर 2012 से 2014 तक मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री भी रहे। इससे पहले थरूर 2007 तक संयुक्त राष्ट्र में थे। संयुक्त राष्ट्र में करीब 29 साल रहने के बाद उन्होंने यूएन महासचिव पद के लिए साल 2006 में अपना नाम भी दिया, हालांकि बान की मून की तुलना में शशि थरूर दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद वो संयुक्त राष्ट्र से अलग हो गए। थरूर एक साहित्यकार, लेखक, उपन्यासकार भी हैं।

डॉ. शशि थरूर का सांसद के तौर पर ये लगातार उनका दूसरा कार्यकाल है। उनकी आयु करीब 62 वर्ष है। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने बी.ए. (ऑनर्स), एम.ए., एम.ए.एल.डी, पीएच.डी, डी. लिट (Honorary) किया है। थरूर लोकसभा में काफी सक्रिय रहे हैं, इसका इस बात से चलता है कि उनकी लोकसभा की कार्यवाही में उपस्थिति 86 फीसदी रही है। इस दौरान उन्होंने 446 बार सवाल उठाए हैं। वहीं करीब 80 बहस में उन्होंने हिस्सा लिया। यानी आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि शशि थरूर लोकसभा में काफी एक्टिव रहे हैं और अपनी बात को उठाते रहे हैं।

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