लोकसभा चुनाव 2019: रायपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की रायपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के रमेश बैस हैं। वो लगातार 6 बार सांसद रहे हैं और कुल मिलाकर रायपुर से 7 बार सांसद रह चुके हैं। रायपुर में मतदाताओं की तादाद 2014 में 19 लाख से अधिक थी। इनमें पुरुष मतदाताओं की तादाद 9 लाख 79 हज़ार से ज्यादा थी। मतदान का प्रतिशत 66 फीसदी रहा था। रमेश बैस ने साढ़े 6 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर विरोधी उम्मीदवार को करीब पौने दो लाख वोटों से हराया था। रायपुर को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इसकी बड़ी वजह है यहां की शहरी आबादी जहां बीजेपी की मजबूत पकड़ है। यहां शहर में जनसंख्या 48.46 फीसदी है। आदिवासियों की आबादी 6 फीसदी और दलितों की आबादी 17 फीसदी है।

रायपुर लोकसभा सीट का लोकसभा इतिहास
रायपुर संसदीय सीट से दिग्गज कांग्रेस नेता विद्या चरण शुक्ला 1991 में दसवीं लोकसभा में चुनकर आए थे। वे यहां से 1971 में भी सांसद रहे थे। 2013 में सुकमा में हुए नक्सली हमले में विद्याचरण शुक्ल शहीद हो गये थे। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता विहीन हो गयी थी। तब नक्सली हमले में 29 नेता मारे गये थे। तब कांग्रेस ने रायपुर की सीट से सत्यनारायण शर्मा को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें बीजेपी के दिग्गज नेता रमेश बैस ने आसानी से हरा दिया। रमेश बैस को 52.36 फीसदी वोट मिले थे।रमेश बैस ने 2009 में भूपेश बघेल को हराया था, जो वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। जबकि, 2004 में उन्होंने श्यामाचरण शुक्ला को शिकस्त दी थी। 2009 में रमेश बैस को 49.19 फीसदी वोट मिले थे,जबकि 2004 में उन्हें 54.54 फीसदी वोट मिले थे।
रमेश बैस का लोकसभा में प्रदर्शन
रमेश बैस ने अपने वर्तमान कार्यकाल में संसद के भीतर सक्रियता नहीं दिखलायी है। दिसम्बर 2018 तक के आंकड़े के अनुसार उन्होंने महज एक बार संसद में हुई बहस में हिस्सा लिया। संसद में सवाल भी महज 4 पूछे। हालांकि उनकी उपस्थिति इतनी बुरी नहीं रही। रमेश बैस ने संसद में 88 फीसदी उपस्थिति रखी है। हालांकि सांसद निधि का भरपूर उपयोग रमेश बैस ने किया है। 25 करोड़ की रकम में से ज्यादातर हिस्सा वे खर्च कर चुके थे। दिसम्बर 2018 तक छत्तीसगढ़ में वे इकलौते सांसद हैं जिनके सांसद निधि में खर्च करने के लिए कोई पैसा नहीं बचा था। यानी पूरा उपयोग सांसद निधि का हुआ।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से बीजेपी सांसद रमेश बैस को हराना टेढ़ी खीर है। आम तौर पर सभी चुनावों में 50 फीसदी के करीब या उससे भी ज्यादा वोट लाते रहे रमेश बैस विरोधी दल खास तौर से कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती हैं। इस चुनौती से निपट पाना बहुत मुश्किल लगता है। अगर 2019 में रमेश बैस चुनाव जीतते हैं तो वे 8वीं बर इस क्षेत्र से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे होंगे।












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