लोकसभा चुनाव 2019: मैनपुरी लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तरप्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद तेज प्रताप यादव हैं। साल 2014 में इस सीट पर मुलायम यादव चुनाव जीते। उन्होंने भाजपा के शत्रुघ्न सिंह चौहान को मैनपुरी सीट से 364666 वोटों से हराया था लेकिन आजमगढ़ की सीट से जीतने की वजह से उन्होंने ये सीट छोड़ दी। साल 1996 से अब तक 8 बार हुए लोकसभा चुनावों में यहां से सिर्फ समाजवादी पार्टी जीतती आई है।

मैनपुरी लोकसभा सीट का इतिहास
यूपी के प्राचीन शहरों में से एक मैनपुरी में 6 तहसील हैं। इनके नाम मैनपुरी, भोंगाओ, करहल, किशनी, कुरावली और घिरोर है। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बादशाह गुप्ता मैनपुरी के पहले सांसद बने थे। 1952 से लेकर 1971 तक इस सीट पर कांग्रेस का ही प्रभुत्व रहा। 1977 के लोकसभा चुनाव में भारतीय लोकदल के रघुनाथ सिंह वर्मा यहां से विजयी हुए जो अगले चुनाव में जनता दल (सेक्युलर) के टिकट पर यहां लड़े और फिर से जीते। साल 1989 में इस सीट पर कांग्रेस की वापसी हुई। 1991 में समाजवादी पार्टी के संस्थापक और नेता मुलायम सिंह यादव मैनपुरी सीट से विजयी हुए, उनके बाद उनकी ही पार्टी के नेता चौधरी बलराम सिंह यहां से लगातार 2 बार जीते। 2004 में मुलायम सिंह दोबारा यहां के सांसद बने, पर कुछ ही महीनों बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिसकी वजह से 2004 में मैनपुरी में उपचुनाव हुए जिसमें इन्ही के भतीजे धर्मेन्द्र यादव विजयी रहे, 2009 में तीसरी बार मुलायम सिंह मैनपुरी के सांसद बने।
तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप मुलायम के बड़े भाई रतन सिंह के बेटे रणवीर सिंह के बेटे हैं। उन्होंने इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में एमएससी की है। लोकसभा में अपने कार्यकाल के दौरान तेज प्रताप यादव ने संसद में 86 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस दौरान तेज प्रताप ने सदन में 16 डिबेट में हिस्सा लिया है और 214 प्रश्न पूछे हैं।
मैनपुरी लोकसभा सीट एक परिचय- प्रमुख बातें
1857 के विद्रोह के दौरान मैनपुरी की भूमिका काफी अहम थी
यादव बाहुल्य क्षेत्र है
2,745 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र की जनसंख्या 1,868,529 है
औसत साक्षरता डर 76% है
93 प्रतिशत आबादी हिंदू और 5 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है
सपा-बसपा गठबंधन में हुए समझौते के मुताबिक ये सीट सपा को मिलने के पूरे आसार हैं।












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