लोकसभा चुनाव 2019: आंवला लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप हैं। साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने ये सीट समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 138429 वोटों से हराकर हासिल की थी। उस साल यहां पर नंबर 2 पर सपा, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर कांग्रेस थी। साल 2014 में यहां पर 1653577 मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें 55 प्रतिशत पुरुष और 44 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। आंवला यूपी का 24वां लोकसभा क्षेत्र है, इसे ये नाम इसलिए मिला क्योंकि यहां आंवला के पेड़ बहुतायत में मिलते हैं।

profile of Aonla lok sabha constituency

आंवला लोकसभा सीट का इतिहास

17वीं शताब्दी की शुरुआत में आंवला में रुहेलों ने राज किया , तब ये शहर रूहेलखंड रियासत की राजधानी हुआ करता था, आंवला की जनसंख्या 45,263 है जिसमें से 52% पुरुष और 48% महिलाएं हैं, यहां की औसत साक्षरता दर 79% है। आंवला लोकसभा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 5 विधान सभा क्षेत्र आते हैं, जिनके नाम हैं शेखुपुर, दातागंज, फरीदपुर, बिथारी चैनपुर और आंवला, जिसमें से फरीदपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। आंवला में पहली बार 1962 में लोकसभा के आम चुनाव हुए और हिन्दू महासभा दल के ब्रिज लाल सिंह यहां के पहले सांसद बने, 1967 में कांग्रेस ने यहां अपना खाता खोला और लगातार 2 बार इस सीट पर जीती, इस दौरान सावित्री श्याम यहा की सांसद रहीं, उन्होंने 10 सालों तक आंवला का प्रतिनिधित्व किया। 1984 में कांग्रेस ने इस क्षेत्र में दोबारा जीत हासिल की और कांग्रेस नेता कल्याण सिंह सोलंकी यहां के सांसद की कुर्सी पर बैठे।

1989 में भाजपा के नेता राजवीर सिंह आंवला के सांसद बने और लगातार 2 बार इस क्षेत्र से जीते, 1996 में सपा ने यहां जीत दर्ज की लेकिन 1998 में यहां बीजेपी की वापसी हुई और राजवीर सिंह यहां से एमपी बने। 1999 साल समाजवादी पार्टी के नाम रहा और सर्वराज सिंह यहां से सांसद बने जबकि 2004 में सर्वराज सिंह ने यहां जनता पार्टी (यूनाइटेड) के टिकट पर जीत हासिल की, 2009 में भाजपा ने आंवला में दोबारा अपना वर्चास्व स्थापित किया और वर्तमान की महिला एवं बाल विकास मंत्री, मेनका गांधी यहां की सांसद बनी और इसके बाद साल 2O14 में फिर से भाजपा ने ही अपना परचम लहराया और भाजपा नेता धर्मेन्द्र कश्यप यहां से एमपी चुने गए।

धर्मेंद्र कश्यप का लोकसभा में प्रदर्शन

धर्मेंद्र कश्यप पहली बार वर्ष 2002 में विधायक चुने गए थे। तब वह बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे, मगर बाद में वह सपा में चले गए। इसके बाद सन् 2007 में सपा के ही टिकट पर वह दोबारा विधायक बने। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आंवला सीट से किस्मत अजमाई, मगर कड़े मुकाबले में मेनका गांधी से पराजित हो गए लेकिन साल 2014 के चुनाव से पहले वो भाजपा में शामिल हो गए और बीजेपी के टिकट पर एमपी चुने गए। पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 94 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने मात्र 8 डिबेट में हिस्सा लिया और 1 प्रश्न पूछा।

धर्मेंद्र कश्यप की जीत में मोदी लहर का भी बहुत बड़ा था, इसलिए इस बार भाजपा की जीत इस सीट पर उन कामों पर निर्भर करेगी, जो बतौर सांसद कश्यप ने यहां किया है। विकास के नाम पर वोट मांगने वाली बीजेपी की वापसी में सीएम योगी फैक्टर भी शामिल होगा क्योंकि राज्य में भाजपा की ही सरकार है, देखते हैं यहां की जनता भाजपा को दोबारा चुनती है या नहीं।

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