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World Economic Forum में बोले पीएम मोदी: आप भारत आएं, भारत में हमेशा आपका स्वागत होगा

नई दिल्ली। दावोस में आख़िरी बार भारत के प्रधानमंत्री की यात्रा सन् 1997 में हुई थी, जब देवे गौड़ा जी यहाँ आए थे। 1997 में भारत का GDP सिर्फ़ 400 billion dollar से कुछ अधिक था। अब दो दशकों बाद यह लगभग 6 गुना हो चुका है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दावोस में विश्व आर्थिक मंच 2018 (WEF,Davos 2018)के पूर्ण सत्र का भाषण के दौरान कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1997 में भी दावोस अपने समय से आगे था, और यह World Economic Forum भविष्य का परिचायक था। आज भी दावोस अपने समय से आगे है। पीएम ने कहा कि इस साल फोरम का विषय Creating A shared Future A fractured World है। यानि दरारों से भरे विश्व में साझा भविष्य का निर्माण। नए-नए बदलावों से, नई नई शक्तियों से आर्थिक क्षमता और राजनैतिक शक्ति का संतुलन बदल रहा है। इससे विश्व के स्वरूप में दूरगामी परिवर्तनों की छवि दिखाई दे रही है। विश्व के सामने शांति, स्थिरता और सुरक्षा को लेकर नई और गंभीर चुनौतियां हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि...

प्रधानमंत्री ने कहा कि...

प्रधानमंत्री ने कहा कि Technology driven transformation हमारे रहने, काम करने, व्यवहार, बातचीत और यहाँ तक कि अंतर्राष्ट्रीय समूहों और राजनीति तथा अर्थव्यवस्था तक को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। Technology के जोड़ने, मोड़ने और तोड़ने- तीनों आयामों का एक बड़ा उदाहरण Social media के प्रयोग में देखने को मिलता है। आज Data (डेटा) सबसे बड़ी संपदा है। Data (डेटा) के global flow से सबसे बड़े अवसर बन रहे हैं, और सबसे बड़ी चुनौतियां भी। Data के पहाड़ के पहाड़ बनते जा रहे हैं। उन पर नियंत्रण की दौड़ लगी हुई है। क्योंकि, ऐसा माना जा रहा है कि जो Data को काबू में रखेगा वही भविष्य पर अपना वर्चस्व बनायेगा।

भविष्य और भावी पीढ़ियों की विरासत के लिए समुचित जवाब मांगते हैं

भविष्य और भावी पीढ़ियों की विरासत के लिए समुचित जवाब मांगते हैं

पीएम ने कहा कि इसी तरह cyber security और nuclear safety के क्षेत्रों में भी तेजी से बदलती हुई technology और विनाशकारी शक्तियों के विस्तार से पहले से चली आ रहीं चुनौतियां और भी गंभीर हो गयी हैं। विज्ञान, तकनीक और आर्थिक प्रगति के नये आयामो में एक ओर तो मानव को समृद्धि के नये रास्ते दिखाने की क्षमता है। वहीं दूसरी ओर, इन परिवर्तनों से ऐसी दरारें भी पैदा हुई हैं जो दर्द भरी चोट पहुंचा सकती हैं। बहुत से बदलाव ऐसी दीवारें खड़ी कर रहे हैं जिन्होंने पूरी मानवता के लिए शान्ति और समृद्धि के रास्ते को दुर्गम ही नहीं दु:साध्य बना दिया है। ये fractures, ये divides और ये barriers विकास के अभाव की हैं, गरीबी की हैं, बेरोजगारी की हैं, अवसरों के अभाव, और प्राकृतिक तथा तकनीकी संसाधनों पर आधिपत्य की हैं। इस परिवेश में हमारे सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं जो मानवता के भविष्य और भावी पीढ़ियों की विरासत के लिए समुचित जवाब मांगते हैं।

सुहाने और साझा भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं?

सुहाने और साझा भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं?

उन्होंने कहा कि क्या हमारी विश्व-व्यवस्था इन दरारों और दूरियों को बढ़ावा दे रही है? वे कौन सी शक्तियाँ हैं जो सामंजस्य के ऊपर अलगाव को तरजीह देती हैं, जो सहयोग के ऊपर संघर्ष को हावी करती हैं? और हमारे पास वे कौन से साधन हैं, वे कौन से रास्ते हैं जिनके ज़रिये हम इन दरारों और दूरियों को मिटाकर एक सुहाने और साझा भविष्य के सपने को साकार कर सकते हैं?

मोदी ने कहा कि...

मोदी ने कहा कि...

मोदी ने कहा कि भारत और भारतीयों ने पूरे विश्व को एक परिवार माना है। विभिन्न देशों में भारतीय मूल के 30 million लोग रह रहे हैं। जब हमने पूरी दुनिया को अपना परिवार माना है, तो दुनिया के लिए भी हम भारतीय उनका परिवार हैं। मैं आप सबका आह्वान करता हूं कि अगर आप वेल्थ के साथ वैलनेस चाहते हैं, तो भारत में काम करें।

आप भारत आएं, भारत में हमेशा आपका स्वागत होगा

आप भारत आएं, भारत में हमेशा आपका स्वागत होगा

मोदी ने कहा कि अगर आप health के साथ जीवन की wholeness यानि समग्रता चाहते हैं तो भारत में आयें। अगर आप prosperity के साथ peace चाहते हैं तो भारत में रहें। आप भारत आएं, भारत में हमेशा आपका स्वागत होगा। मुझे आप सब से बातचीत करने का यह बहुमूल्य अवसर प्रदान करने के लिए, World Economic Forum का, श्री क्लास श्वाब का और आप सबका मैं ह्रदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ।

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