'उनसे पूछो किसने भेजा...', प्रियंका गांधी ने हिंदू जनसंख्या में गिरावट वाली रिपोर्ट को बताया गलत!
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने हाल ही में एक अध्ययन प्रकाशित किया जिसमें 1950 से 2015 तक विभिन्न देशों में धार्मिक जनसांख्यिकी में बदलाव का विश्लेषण किया गया। "धार्मिक अल्पसंख्यकों का हिस्सा: एक क्रॉस-कंट्री विश्लेषण" नामक अध्ययन में कहा गया है 1950 से 2015 तक जनसांख्यिकी में परिवर्तन के निष्कर्षों के अनुसार, भारत की हिंदू बहुसंख्यक आबादी में 65 साल की अवधि के दौरान 7.81 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक सियासी हलचल तेज हो गयी है। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने इस रिपोर्ट को लेकर हुए सवाल पर कोई खास प्रतिक्रिया ना देते हुए सवाल से किनारा कर लिया।
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प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
भारत की जनसंख्या पर प्रधानमंत्री पैनल की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद तमाम तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 1950 से 2015 तक हिंदू आबादी में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आने की रिपोर्ट सामने आने के बाद, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से जब इस पर एक सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
पत्रकार ने जब प्रियंका गांधी से पूछा कि 1950 से 2015 तक हिंदू आबादी में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसपर आपका क्या कहना है। इस सवाल पर कोई सीधा जवाब देने कि बजाय प्रियंका ने कहा, "आपके पास ये सवाल कहा से आया है। आपको जिन्होंने यह सवाल दिया है उनसे उनसे पूछो ये (रिपोर्ट) किसने भेजा उन्हें।"
#WATCH | Raebareli, Uttar Pradesh: A study by the Economic Advisory Council to the Prime Minister (EAC-PM) reveals that the population share of Hindus fell by 7.81 percent between 1950 and 2015 while the share of minorities increased.
Congress General Secretary Priyanka Gandhi… pic.twitter.com/6WyoZuW0F4
— ANI (@ANI) May 9, 2024
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार, 1950 में बहुसंख्यक धार्मिक संप्रदाय की हिस्सेदारी का वैश्विक औसत 75% था। 2015 तक, यह आंकड़ा लगभग 22% कम हो गया था, जो अधिक धार्मिक विविधता की ओर वैश्विक रुझान का संकेत देता है। अध्ययन महत्वपूर्ण क्षेत्रीय अंतरों पर प्रकाश डालता है। उदाहरण के लिए, सबसे बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव वाले आधे से अधिक देश अफ्रीका में स्थित हैं, जहां एनिमिस्ट बहुमत से अन्य धार्मिक संप्रदायों में बदलाव सबसे आम थे।
भारत जैसे देशों और कई ओईसीडी देशों ने भी अपने बहुसंख्यक धार्मिक शेयरों में गिरावट देखी है, जो धार्मिक जनसांख्यिकी के विविधीकरण का संकेत है। इसके विपरीत, कई मुस्लिम-बहुल देशों में उनके प्रमुख धार्मिक समूहों की हिस्सेदारी में वृद्धि देखी गई है।
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