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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पहली दया याचिका को किया खारिज

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने कार्यकाल के दौरान पहली फांसी की दया याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने जगत राय को फांसी दिए जाने की सजा पर तकरीबन पांच वर्ष पहले रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने राष्ट्रपति से दया याचिका की गुहार लगाई थी। लेकिन राष्ट्रपति ने फांसी की सजा माफ करने से इनकार कर दिया है। यह पहली दया याचिका है जिसपर राष्ट्रपति ने अपना फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इस मामले पर तकरीबन 10 महीने तक सलाह मशविरा किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह मामला बिहार का है, जहां खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर राज्यपाल रह चुके हैं।

पूरे घर को उतारा मौत के घाट

पूरे घर को उतारा मौत के घाट

जगत राय पांच बच्चों, विजेंद्र महतो और उसकी पत्नी की हत्या का दोषी है। उसने 1 जनवरी 2006 को बिहार के वैशाली जिले के रामपुर श्यामचंद गांव में जब विजेंद्र महतो के घर में आग लगा दी थी, जब परिवार घर में सो रहा था। सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा था, कोर्ट ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए फांसी की सजा को खत्म करने से इनकार कर दिया था।

प्रणब मुखर्जी ने नहीं लिया था कोई फैसला

प्रणब मुखर्जी ने नहीं लिया था कोई फैसला

गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राय की दया याचिका को पिछले वर्ष तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा गया था, लेकिन वह इसपर कोई फैसला नहीं ले सके क्योंकि उस वक्त देश के 14वें राष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। जुलाई माह में उन्होंने अपना कार्यालय छोड़ दिया था, जिस वक्त प्रणब मुखर्जी ने अपना कार्यालय छोड़ा उस वक्त राष्ट्रपति के पास कुल 34 दया याचिका लंबित थी, जिसमे से 30 की दया याचिका को प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया था, जबकि चार की फांसी को माफ कर दिया था।

क्या रहा है पूर्व राष्ट्रपति का रिकॉर्ड

क्या रहा है पूर्व राष्ट्रपति का रिकॉर्ड

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति आर वेंकटरमण ने 45 दया याचिका को खारिज किया था, इसके बाद सबसे अधिक दया याचिका को खारिज करने का रिकॉर्ड प्रणब मुखर्जी के पास है। पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन ने एक भी दया याचिका पर सुनवाई नहीं की, जबकि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने दो दया याचिका को खारिज किया था। वहीं पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सिर्फ 5 दया याचिका को खारिज किया और 34 की फांसी की सजा को माफ कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार रामनाथ कोविंद ने राय की दया याचिका को पढ़ने और कानूनी राय और गृह मंत्रालय से सलाह मशविरा करने के बाद उसे खारिज कर दिया था।

क्या है मामला

क्या है मामला

दरअसल विजेंद्र महतो ने आरोप लगाया था कि जगत राय, वजीर राय, अजय राय ने उसकी भैंस चुरा ली है, यही नहीं उसने जगत के खिलाफ पुलिस केस वापस लेने से इनकार कर दिया था, जिसकी उसे बारी कीमत चुकानी पड़ी। 1 जनवरी 2006 की रात जब महतो की पत्नी बेबी देवी, बेटा सूरज, अनिलऔर राजेश, बेटी पूनव और नीलम सो रही थीं तभी उनके घर में जगत राय ने आग लगा दी। इस घटना के बाद महतो काफी बुरी तरह से जल गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी। अपनी मौत से पहले उसने कोर्ट में अपना बयान दिया था। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौके पर पहुंचे थे। यही नहीं लालू प्रसाद यादव ने भी यहां का दौरा किया था।

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