B'Day Special: राष्ट्रपति भवन का आनंद लेने के लिए घोड़ा तक बनने को तैयार थे प्रणब दा
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आज 80वां जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है और उनके लंबी उम्र की कामना की है। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्वीटर पर मोदी ने लिखा है कि प्रणब मुखर्जी के जन्मदिन पर मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं। भगवान उन्हें लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करे। मोदी ने लिखा कि सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रपति मुखर्जी ने देश की सेवा की है।
प्रणब दा एक आदरणीय नेता भी रह चुके हैं। हमें उनसे राजनीतिक जीवन की प्रेरणा लेने की जरूरत है। मोदी ने लिखा है कि राष्ट्रपति मुखर्जी द्वारा सार्वजनिक जीवन में बिताया गया समय उन्हें हमारे देश के लिए एक अमूल्य निधि बनाता है। उनकी जैसी बुद्धिमत्ता और समझदारी रखने वाला कोई विरला ही होगा। तो आईए आज जन्मदिन के मौके पर प्रणब दा के जिंदगी के बारे में चर्चा करते हैं। आपको बताते हैं कि कैसे एक गांव से राष्ट्रपति भवन का तक सफर तय किया प्रणब दा ने। इस चर्चा से पहले वनइंडिया की तरफ से भी राष्ट्रपति प्रणब दा को जन्मदिन की ढेर सारी बधाईयां।

11 दिसंबर 1935 को हुआ था जन्म
प्रणव मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले में किरनाहर शहर के निकट स्थित मिराती गाँव के एक ब्राह्मण परिवार में कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के यहाँ हुआ था।

स्वतंत्रता सेनानी थे प्रणब दा के पिता
प्रणब मुखर्जी के पिता कामदा किंकर मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे और वो 10 वर्ष से भी अधिक जेल में रहे। उन्होंने 1920 से लेकर सभी कांग्रेसी आंदोलनों में हिस्सा लिया।

पत्रकारिता से हुई करियर की शुरुआत
कलकत्ता विश्वविद्यालय से उन्होंने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के साथ साथ कानून की डिग्री हासिल की है। वे एक वकील और कॉलेज प्राध्यापक भी रह चुके हैं। उन्हें मानद डी.लिट उपाधि भी प्राप्त है। उन्होंने पहले एक कॉलेज प्राध्यापक के रूप में और बाद में एक पत्रकार के रूप में अपना कैरियर शुरू किया।

1969 से शुरु हुआ राजनीतिक करियर
संसदीय कैरियर करीब पाँच दशक पुराना है, जो 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) से शुरू हुआ था। वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से चुने गये। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।

1984 में बने देश के वित्त मंत्री
प्रणब दा सन 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे और और सन् 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। सन 1984 में, यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उनका विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया।

प्रणब दा को है बागबानी का शौक
प्रणब मुखर्जी को बागवानी, किताबें पढ़ना और संगीत पसंद है।

13 नंबर से है खास नाता
प्रणब मुखर्जी का 13 से अनोखा नाता रहा है। वे 13 तारीख को ही राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरे। वो 13वें राष्ट्रपति हैं। 13 नंबर का बंगला है दिल्ली में। 13 तारीख को आती है शादी की सालगिरह। इतना ही नहीं 13 जून को ही ममता ने प्रणब का नाम उछाला था।

राष्ट्रपति भवन को निहारा करते थे प्रणब दा
जब 1969 में प्रणब राज्यसभा के सदस्य बने तो उनका आधिकारिक घर राष्ट्रपति संपदा के पास ही था। राष्ट्रपति भवन के ठाठ को प्रणब खूब निहारा करते थे।

राष्ट्रपति भवन का आनंद लेने के लिए घोड़ा बनने को तैयार थे प्रणब दा
एक दिन उन्होंने राष्ट्रपति की घोड़े वाली बग्गी को देखकर अपनी बहन अन्नापूर्णा बनर्जी से कहा कि इस आलीशान राष्ट्रपति भवन का आनंद उठाने के लिए वो अगले जन्म में घोड़ा बनना पसंद करेंगे। लेकिन तब उनकी बहन ने उन्हें कहा था - 'इसके लिए तुम्हें अगले जन्म तक रुकना नहीं पड़ेगा बल्कि इसी जन्म में तुम्हें इसमें रहने रहने का मौका मिलेगा।'

सोनिया गांधी प्रणब दा को मानती हैं गुरु
राजीव गांधी की मौत के बाद वे राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी के करीबी समर्थक बन गए। इस बीच कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी उन्हें अपना गुरु कहती हैं।

चॉकलेट खाना बहुत पसंद हैं प्रणब दा को
प्रणब दा चॉकलेट खाना खूब पसंद करते हैं। चाचा चौधरी की कॉमिक्स के फैन रहे हैं।












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