President Election 2022:जानिए कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव, कौन देता है वोट?
President Election 2022:जानिए कैसे होता है राष्ट्रपति चुनाव, कौन देता है वोट?
नई दिल्ली, 09 जून: भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म होने वाला है। कोविंद का कार्यकाल खत्म होने से पहले राष्ट्रपति चुनाव होगा। राष्ट्रपति चुनाव की घोषणा गुरुवार को हो चुकी है 18 जुलाई को चुनाव होंगे और 21 जुलाई को परिणाम आएंगे। इससे पहले 17 जुलाई 2017 को राष्ट्रपति चुनाव हुए थे, जिसके बाद रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली थी। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले जानिए कैसे होता है चुनाव और कौन करता है वोट?

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बता दें भारत का राष्ट्रपति भारत का मुखिया होता है और भारत का पहला नागरिक भी होता है। भारतीय संविधान केअनुच्छेद 52 में उल्लेख है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं जो भारत के 14वें राष्ट्रपति हैं।
- राष्ट्रपति चुनाव में आम जनता की भागीदारी नहीं होती है।
- ये चुनाव Electoral College नामक एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
- राष्ट्रपति को Electoral College चुनता है।
- राष्ट्रपति चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है।
- जिसमें संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य और सभी राज्यों के सभी विधायक शामिल होते हैं।
- सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम के तहत एक वोटर एक ही वोट देता है।
- राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्येक विधायक के वोट का वैल्यू 1971 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या के अनुपात में किया जाता है।
- निर्वाचक मंडल में राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए 5,49,442 का वोट वैल्यू पर्याप्त है।
- निर्वाचक मंडल में 4,896 विधायक हैं।
- इसमें 776 लोकसभा और राज्यसभा सदस्य और 4,120 विधायक शामिल हैं।
- हालांकि इस बार यह संख्या 4,809 होगी इसके पीछे वजह है कि जम्मू-कश्मीर में एक भी विधानसभा नहीं है जहां 87 विधायक हुआ करते थे। मनोनीत सदस्य और एमएलसी वोट देने के पात्र नहीं हैं।
- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा अपसेन्ट होने के कारण जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में संसद सदस्य के वोट का वैल्यू 708 से घटकर 700 हो सकती है।
- राष्ट्रपति चुनाव में एक सांसद के वोट का मूल्य दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू और कश्मीर सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में निर्वाचित सदस्यों की संख्या पर आधारित होता है।
- राष्ट्रपति चुनाव के लिए इलेक्टोरल कॉलेज में लोकसभा, राज्यसभा और दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू और कश्मीर सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के सदस्य शामिल होते हैं।
- अगस्त 2019 में लद्दाख और जम्मू और कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने से पहले, जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्य में 83 विधानसभा सीटें थीं।
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, जबकि लद्दाख पर सीधे केंद्र का शासन होगा।
- भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए और विपक्षी दल राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने-अपने उम्मीदवार उतारेंगे।
- विपक्ष ने अभी तक राष्ट्रपति पद के लिए संयुक्त उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।
- बीजेपी के पास सभी विधायकों और सांसदों के वोट शेयर का 48.9 फीसदी है।
- विपक्ष और अन्य दलों के पास 51.1 फीसदी है। भाजपा को अपना उम्मीदवार चुनने के लिए बीजद या वाईएसआर कांग्रेस में से किसी एक के वोट की आवश्यकता होगी।
संक्षेप में समझें गणित
- चुनाव से पहले राज्यों की विधानसभा के विधायकों के वोटों की वैल्यू को जोड़ा जाता है।
- इस टोटल वैल्यू में लोकसभा और राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या को भाग दिया जाता है।
- भाग देने पर जो नंबर आता है, वो एक सांसद के वोट की वैल्यू होती है।












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