Premanand Maharaj: बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड कल्चर पर प्रेमानंद महाराज की कड़वी बात, लग सकती है बुरी!
Premanand Maharaj: वृंदावन के फेमस संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने युवाओं, खासकर लड़के-लड़कियों के आचरण पर टिप्पणी करते हुए 'बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड' के रिश्तों को बंद करने की सलाह दी है। उनका यह संदेश हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक नई बहस छेड़ दी है।
माया को बताया बुरी संगत
अपने प्रवचन के दौरान, प्रेमानंद महाराज ने युवाओं से माता-पिता की आज्ञा का पालन करने, सदाचार बनाए रखने और नाम जप करने का आग्रह किया। उन्होंने समझाया कि "बुरी संगति ही माया है और अच्छी संगति भगवान से जोड़ती है।" उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति को आध्यात्मिक और नैतिक विकास की ओर ले जाता है।

हम कड़वा भी बोलेंगे- प्रेमानंद महाराज
संत प्रेमानंद ने अपने उपदेश को स्पष्ट करने के लिए एक दृष्टांत का उपयोग किया। उन्होंने कहा, "नाली के कीड़े को नाली में ही सुख मिलता है। उसको अमृत कुंड मैं डालोगे तो उसे अच्छा नहीं लगेगा।" उनका तात्पर्य था कि "जो लोग गंदे आचरण कर रहे हैं, उनको सही बात या उपदेश तो खराब ही लगेगा।" उन्होंने अपने अनुयायियों को बच्चे मानते हुए यह भी कहा, "आप सब बच्चे हो और यहां सुधरने के लिए आए हो। इसलिए हम कड़वा भी बोलेंगे।"
'बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बनाना बंद करो'
महाराज ने अपने मुख्य संदेश को दोहराते हुए कहा, "आप लोग बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बनाना बंद करो। माता-पिता की आज्ञा का पालन करो और अच्छे आचरण करो।" उन्होंने जोर देकर कहा कि संतों की बातों पर बुरा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि यदि ऐसा किया गया तो शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करना असंभव होगा। यह उपदेश सनातन मूल्यों के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाता है।
पहले भी महाराज दे चुके कड़वे प्रवचन
यह पहला मौका नहीं है जब प्रेमानंद महाराज ने ऐसे बयान दिए हैं। हाल ही में उनका एक और वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने लड़के-लड़कियों के आचरण पर इसी तरह की टिप्पणी की थी। उस समय भी उनके बयान पर समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं - जहां एक वर्ग ने विरोध किया, जबकि ज्यादातर लोग उनके समर्थन में भी खड़े हुए थे। करीब दस दिनों के भीतर इसी मुद्दे पर उनका यह दूसरा बयान है, जिसके कारण उनके विरोध की संभावना एक बार फिर बढ़ गई है। हालांकि उनसे आस्था रखने वालों की संख्या अभी भी कई गुना ज्यादा है।
प्रेमानंद जी महाराज की इस बात पर अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।












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