'सही इरादों के साथ किया जाए, तो देश के हित में', वन नेशन-वन इलेक्शन पर बोले प्रशांत किशोर
कई विपक्षी दलों ने लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के नरेंद्र मोदी सरकार के कदम का विरोध किया है। वहीं, प्रशांत किशोर ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' कदम का समर्थन किया है।
चुनाव रणनीतिकार से कार्यकर्ता बने प्रशांत किशोर ने सोमवार को केंद्र के 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर इसे 4-5 साल के परिवर्तन चरण के साथ सही इरादों के साथ किया जाता है, तो यह देश के हित में है।
किशोर ने याद दिलाया कि कैसे आजादी के बाद से 1967 तक 18 सालों तक देश में एक साथ चुनाव होते रहे। उन्होंने उन कारणों का भी हवाला दिया जो एक ही समय में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में काम कर सकते हैं। खर्चों में आएगी कमी...

किशोन ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में, हर साल लगभग 25% लोग मतदान करते हैं। इसलिए सरकार चलाने वाले लोग चुनाव के इसी चक्र में व्यस्त रहते हैं। इसे 1-2 बार तक सीमित रखें तो बेहतर होगा। इससे खर्चों में कमी आएगी और लोगों को केवल एक बार ही निर्णय लेना होगा।
यदि आप रातोंरात परिवर्तन का प्रयास करते हैं, तो समस्याएं होंगी। सरकार शायद एक विधेयक ला रही है। आने दो। अगर सरकार की मंशा अच्छी है तो ऐसा होना चाहिए और यह देश के लिए अच्छा होगा...लेकिन यह उस मंशा पर निर्भर करता है कि सरकार इसे किस इरादे से ला रही है।
'भारतीय संघ और सभी राज्यों पर हमला'
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' कदम पर हमला बोला। इसे भारतीय संघ और उसके सभी राज्यों पर हमला बताया। उनके कांग्रेस सहयोगी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में कानून मंत्रालय द्वारा गठित पैनल में शामिल होने से इनकार कर दिया।












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