हफ्ते में 6 दिन मजदूरी, महीने में 4 दिन मटन-चिकन, जेल में Prajwal Revanna की कैसी होगी जिंदगी, कितनी सैलरी?
Prajwal Revanna in Bengaluru Central Jail: कर्नाटक की राजनीति का वो चेहरा, जो कभी सांसद की कुर्सी पर बैठता था, आज जेल की सलाखों के पीछे कैदी की तरह जिंदगी बिता रहा है। हासन से पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को एक हाई-प्रोफाइल रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद अब वह बेंगलुरु सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। कभी जिनके फैसले संसद में गूंजते थे, अब वही व्यक्ति जेल में मजदूरी के लिए तैयार है।
प्रज्वल रेवन्ना, जिन्हें अप्रैल 2024 में दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया गया, अब जेल प्रशासन की नजर में कैदी नंबर 15528 हैं।

सप्ताह में 6 दिन काम करना होगा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को अब तक बेंगलुरु सेंट्रल जेल में किसी तरह की जेल ड्यूटी नहीं सौंपी गई है। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि नियमों के अनुसार, उन्हें अगले सोमवार से काम पर लगाया जा सकता है। जेल मैन्युअल के मुताबिक, सभी सजायाफ्ता कैदियों को स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर, सप्ताह में 6 दिन काम करना होता है। यह कार्य आमतौर पर 8 घंटे की शिफ्ट में होता है, जिसमें कैदियों को बेकरी में मदद करना, कपड़े सिलना, या अन्य श्रम-आधारित कार्य सौंपे जाते हैं।
इतनी मिलेगी सैलरी
यह भी बताया गया है कि नया कैदी होने के नाते रेवन्ना को शुरुआती दिनों में किसी अकुशल श्रमिक के रूप में ड्यूटी दी जा सकती है। इसके लिए हर सोमवार को जेल प्रशासन द्वारा सभी नए कैदियों की जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाता है। हालांकि काम की प्रकृति कोई भी हो, एक कैदी को उसके बदले केवल ₹540 प्रति माह का मानदेय मिलता है, जो भारतीय सांसद के रूप में मिलने वाली ₹1.2 लाख मासिक सैलरी से नाटकीय रूप से अलग है।
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जेल में जीवन कैसा है?
- बेंगलुरु सेंट्रल जेल में दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे होती है।
- 11:30 बजे से 12 बजे के बीच दोपहर का भोजन
- शाम तक डिनर और 6:30 बजे बैरक में वापसी
- भोजन में चपाती, रागी बॉल्स, चावल, सांभर और छाछ होता है।
गैर-शाकाहारी खाने में
- मंगलवार को अंडा
- प्रत्येक पहले और तीसरे शुक्रवार को मटन
- दूसरे और चौथे शनिवार को चिकन दिया जाता है।
परिवार से संवाद की सीमित सुविधा
सजायाफ्ता कैदी बनने के बाद प्रज्वल रेवन्ना को अब अपने परिवार और करीबियों से संपर्क करने की बेहद सीमित सुविधाएं मिली हैं। जेल नियमों के अनुसार, उन्हें प्रत्येक सप्ताह केवल दो बार 10 मिनट की टेलीफोन कॉल की अनुमति है, और सप्ताह में सिर्फ एक बार किसी पारिवारिक सदस्य या मित्र से आमने-सामने मुलाक़ात की इजाज़त दी जाती है। यह प्रतिबंध जेल जीवन की कठोरता और सामाजिक अलगाव को दर्शाता है, जो किसी भी कैदी के लिए मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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