Pollution Budget 2026: पॉल्यूशन पर चिल्लर खर्च कर रही सरकार! हर साल 20 लाख मौतें और बजट इतना कम?
Pollution Budget 2026: भारत की हवा हर बीतते साल के साथ और ज्यादा प्रदूषित और जहरीली होती जा रही है। पहले केंद्र में बीजेपी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के बीच मतभेद होते थे। लेकिन अब केंद्र, दिल्ली और MCD तीनों में ही बीजेपी काबिज है। बावजूद इसके, इस सीजन में प्रदूषण 700 के आंकड़े के पार गया।
वहीं सरकार से कोई जिम्मेदारी वाले बयान नहीं आए। उम्मीद थी कि बजट में प्रदूषण को एक अलग और गंभीर मुद्दा मानकर बजट मिलेगा। लेकिन सरकार कि बेरुखी जारी किए बजट में साफ दिखी। दूसरी तरफ, बात दिल्ली से दूर अब देश के दूसरे शहरों की हवा तक पहुंच गई है, लेकिन सरकार का रवैया सुस्त रहा।

बजट में साफ हवा के अधिकार को ठेंगा!
साल 2026-27 के बजट में पॉल्यूशन कंट्रोल के लिए केवल 1,091 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल के 1,300 करोड़ रुपये से भी कम है। यह बजटीय कमी बिगड़ते पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की अनदेखी करती है और साफ हवा के अधिकार के पहल को ठेंगा दिखाती है।
जबकि इसके पहले साल 2024-25 में 858 करोड़ रुपए आवंटित हुए लेकिन संसदीय समिति से अनुमति न मिलने की वजह से सिर्फ 16 करोड़ रुपए ही खर्च हो सके जो कुल बजट का 1% से भी कम था।
हर साल 20 लाख मौतें सिर्फ प्रदूषण से
स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर साल 20 लाख से ज्यादा मौतें सिर्फ जहरीली हवा के कारण होती हैं। इसमें सिर्फ दिल्ली में ही 21,262 सांस संबंधी बीमारियों से हुईं जिनका कारण डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से प्रदूषण ही था। वहीं दुनियाभर में प्रतिदिन 2 हजार बच्चे जहरीली हवा में सांस लेने से मर जाते हैं जिसमें से एक बड़ा हिस्सा भारत का है।
Office Of The Chief Registrar (Births & Deaths) की ओर से जारी किए गए डेटा में MCD, NDMC और अन्य बॉडीज से जारी हुए कुल मेडिकली सर्टिफाइड डेथ्स में 10 प्रतिशत मौतें सिर्फ सांस संबंधी बीमारियों से हुईं। जिनकी संख्या 90,883 के लगभग है।
जानलेवा समस्या के आगे बौना बजट
MoEFCC (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) को इस साल बजट में 3,759.46 करोड़ रुपये मिले हैं। जो पिछले साल 2025-26 की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन वह इसका खर्च कैसे और कहां करते हैं यह साल 2026 में आने वाली सर्दियों में पता चल सकेगा। लेकिन उसके पहले, एक्सपर्ट मानते हैं कि बजट जरूरत के हिसाब से काफी कम है। जो इस साल फिर से चुनौती बन सकता है।
भारत में कितने शहरों की हवा जहरीली
दुनियाभर के 50 सबसे प्रदूषित शहरों में से ज्यादातर भारत में ही हैं। जिसमें दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद, सोनीपत, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, ग्वालियर, गंगापुर, चरखी दादरी, मेरठ और कानपुर जैसे शहर शामिल हैं। बावजूद इसके न तो इन राज्यों की सरकार, न इन जिलों के प्रशासन और न ही केंद्र सरकार का इस ओर ध्यान है।
तो फिर कहां होता है पैसा खर्च?
पर्यावरण मंत्रालय प्रदूषण के लिए जारी हुए बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ संस्थाओं, उनके अंदर काम कर रहे कर्मचारियों की तन्ख्वाह और जागरुकता कार्यक्रमों पर खर्च करता है। जिसका मेन फोकस नियामक ढांचों को मजबूत रखना है। इसमें बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और विशेष रूप से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) जैसी संस्थाओं के अंतर्गत आने वाले कार्यालयों पर काफी पैसा खर्च होता है। लेकिन नतीजा आप हर साल दखते हैं।
2025 में क्या रहा प्रदूषण का हाल?
स्मॉग गन, स्मॉग टॉवर, आर्टिफिशियल बारिश और न जाने किन-किन चीजों पर सरकार ने करोड़ों रुपए फूंके। बावजूद इसके साल 2025 में प्रदूषण ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दिल्ली NCR के कई इलाकों में प्रदूषण 700 के पार गया जो बताता है कि स्थानीय प्रशासन हर बार की तरह 2025 में भी बुरी तरह फेल हुआ।
एयर प्यूरिफायर पर अभी भी 18% टैक्स
इतने सारी विफलताओं में से एक और विफलता ये भी है कि स्वच्छ हवा के अधिकार के बावजूद आम जनता को साफ हवा नहीं मिल रही है। इसके अलावा घर में साफ हवा के लिए यदि आम आदमी एयर प्यूरिफायर खरीदता है तो उस पर अभी भी 18% GST चुकाना होगा। उम्मीद थी कि सरकार इस बार सरकार शायद एयर प्यूरिफायर को टैक्स फ्री कर दे। लेकिन इस पर भी सरकार ने पानी फेर दिया।
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