राजस्थान में छिड़ा है सियासी संग्राम और सचिन पालयट ने स्पीकर जोशी को भेजी शुभकामनाएं, क्या है माजरा?
नई दिल्ली। राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच छिड़े सियासी संग्राम को 10 दिन से अधिक हो चुका है और लगतार तीसरी बार राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान कैबिनेट द्वारा 31 जुलाई को विधानसभा सत्र बुलाने से इनकार ने सियासी तूफान खड़ा हो गया है, लेकिन इस बीच सचिन पायलट ने राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को जन्मदिन देकर सबको चौंका दिया है।
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पायलट ने विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी
राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम रहे पायलट ने विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजते हुए एक ट्वीट में लिखा, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।

पायलट समेत 19 विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे सीपी जोशी
अब सवाल यह है कि मौजूदा संग्राम के बीच पायलट ने स्पीकर को बधाई क्यों दी है, जो पायलट समेत 19 विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। यह अलग बात है कि उन्होंने बाद में दायर याचिका वापस ले ली थी।

विधायक दल की बैठक में शामिल न होने पर पायलट को बर्खास्त कर दिया
बागी नेता सचिन पायलट समेत पार्टी के 19 विधायकों के बगावत के बाद राज्य में सियासी संकट जारी है। पार्टी ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल न होने पर पायलट पर पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उप-मुख्यमंत्री पद और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था। पार्टी ने अन्य विधायकों पर भी कार्रवाई की।

विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने बागी विधायकों को अयोग्यता नोटिस जारी किया
वहीं, पायलट की बर्खास्तगी के बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बागी विधायकों को अयोग्यता नोटिस भी जारी किया गया, जिसको चुनौती देते हुए पाटलट ने राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और कोर्ट ने 24 जुलाई तक बागी विधायकों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जिसके बाद स्पीकर सीपी जोशी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

सचिन बनाम गहलोत की लड़ाई अब CM गहलोत बनाम राज्यपाल में बदली
फिलहाल, राजस्थान में सचिन पायलट गुट बनाम अशोक गहलोत गुट में शुरू हुई लड़ाई अब सीएम अशोक गहलोत बनाम राज्यपाल में बदल गई है। राज्यपाल कलराज मिश्र और सीएम गहलोत के बीच विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर टकराव जारी है और तीसरी बार राज्यपाल ने सीएम गहलोत के 31 जुलाई से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को नकार दिया है।

राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर 3 बातों पर स्पष्टीकरण मांगा
दरअसल, राज्यपाल कलराज मिश्र मुख्यमंत्री गहलोत मंत्रि मंडल से विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर तीन बातों पर स्पष्टीकरण मांगा है।राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 21 दिन का नोटिस देने के अलावा बहुमत साबित करने और कोरोना संक्रमण से उपजे हालात को स्पष्टीकरण मांगा है।

गहलोत सरकार का दावा है कि तीसरे प्रस्ताव में उनके पास बहुमत है
गहलोत सरकार का दावा है कि राज्यपाल को भेजे गए तीसरे प्रस्ताव में उनके पास बहुमत है, लेकिन नए प्रस्ताव पर राज्यपाल ने कहा कि वह इसको वेरिफाई कर रहे हैं। हालांकि राज्यपाल को भेजे गए अशोक गहलोत के तीसरे प्रस्ताव के एजेंडे में भी विश्वास मत शामिल नहीं है।

'राज्यपाल बीजेपी के कार्यकर्ता नहीं हैं, राजस्थान सरकार के प्रमुख हैं'
कैबिनेट की बैठक के तत्काल बाद परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खारियावास ने कहा कि सत्र बुलाने का हमारा कानूनी अधिकार है। सीएम गहलोत के विश्वासपात्र खचरियावास ने कहा था कि राज्यपाल कलराज मिश्र बीजेपी के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि राजस्थान सरकार के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि ये हमारा नैतिक और कानूनी अधिकार है कि हम संवैधानिक प्रमुख के घर जाएं और उन्हें अपनी समस्याएं कहें।

कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद व अश्विनी कुमार ने राज्यपाल को लिखा पत्र
उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और अश्विनी कुमार ने गत सोमवार को राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर कहा था कि राज्य सरकार के मंत्रियों और कैबिनेट द्वारा पास विधानसभा सत्र बुलाने के प्रस्ताव को राज्यपाल को पास करना होता है, ये संवैधानिक नियम है। इसके अलावा संविधान के आर्टिकल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार विधानसभा का सेशन बुलाना राज्यपाल का कर्तव्य है। उन्होंने संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए जल्द विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की है।

विशेष विधानसभा सत्र की मांग के प्रस्ताव दो बार लौटा चुके हैं राज्यपाल
राज्यपाल विशेष विधानसभा सत्र की मांग के प्रस्ताव वाली राज्य सरकार की फाइल को दो बार लौटा चुके हैं। लगता है कि गहलोत सरकार 31 जुलाई से विशेष सत्र बुलाने पर अब अडिग है, लेकिन तीसरा प्रस्ताव नकारे जाने के बाद गहलोत सरकार मुश्किल में फंसती जा रही है और अब गहलोत सरकार अन्य विकल्पों पर रणनीति बनाने में जुट गई है।

बसपा प्रमुख मायावती ने भी गहलोत सरकार की मुश्किलें और बढ़ा रही हैं
उधर, बसपा प्रमुख मायावती ने भी गहलोत सरकार की मुश्किलें और बढ़ा रही हैं। मायावती ने कहा है कि वो राजस्थान में अपने 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के मामले को लेकर बसपा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेगी और पार्टी ने विधायकों के विलय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात भी कही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अशोक गहलोत सरकार पर निशाना साधा और कहा, हम कांग्रेस और अशोक गहलोत को सबक सिखाएंगे।












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