शंकर सिंह वाघेला: गुजरात में नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे लोकप्रिय नेता
नई दिल्ली। गुजरात में नरेंद्र मोदी के बाद अगर कोई दूसरा लोकप्रिय नेता है तो वह शंकर सिंह वाघेला है। जिन्हें लोग सुनना पसंद करते हैं। बापू के नाम से मशहूर शंकर सिंह वाघेला गुजरात में कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं। 77 साल के शंकर सिंह वाघेला का जन्म 21 जुलाई 1940 में गांधीनगर जिले के वासन के एक राजपूत परिवार में हुआ था। उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स काी पढ़ाई की है।

राजनीतिक जीवन के साथ शुरूआत जनसंघ से
वाघेला ने अपने राजनीतिक जीवन के साथ शुरूआत जनसंघ की थी। जिसे बाद में वे जनता पार्टी में चले गए। जनता पार्टी के विभाजन के बाद वाघेला ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता बने। 1996 में, वह भाजपा से भी अलग हो गए और राष्ट्रीय जनता पार्टी की स्थापना की। अक्टूबर 1996 से अक्टूबर 1997 तक वाघेला गुजरात के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। बाद में, उनकी पार्टी का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) में विलय हो गया। 21 जुलाई 2017 को, उन्होंने फिर से कांग्रेस छोड़ दी और विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा दे दिया।

गुजरात में लोग बापू भी कहते
वाघेला ने कुल छह बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था और तीन बार सांसद बने थे। वाघेला साल 1977 में पहली बार सांसद बने थे। वह 1984 से 1989 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। उन्होंने 2004 से 2009 के बीच यूपीए की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री रहे। वाघेला को गुजरात में लोग बापू भी कहते हैं। वो गुजरात के अकेले ऐसे नेता हैं जिन्हें गुजरात के 18000 गांवों में कम से कम दस लोग जानते होंगे।

40 सालों से भी ज्यादा से राजनीति में हैं
40 सालों से भी ज्यादा से राजनीति में हैं। कभी वाघेला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुरु माना जाता था। वाघेला अकेले ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के अध्यक्ष रह चुके हैं। जनसंघ, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, जनता पार्टी, बीजेपी, उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी हो या फिर कांग्रेस, वाघेला ने हमेशा अपनी पार्टी और सांगठनिक ढांचे को दरकिनार कर फ़ैसले लिए हैं। वाघेला बाद में कांग्रेस के समर्थन से गुजरात में मुख्यमंत्री बन गए थे। बाद में वाघेला की राष्ट्रीय जनता पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया था। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य भी रह चुके हैं।

व्यक्तिगत महत्वकांक्षा ने उन्हें बीजेपी में बागी बनाया
1995 से पहले उन्होंने बीजेपी के लिए गुजरात में जी-तोड़ मेहनत की थी। गुजरात भारत में पहला ऐसा राज्य बना जहां बीजेपी ने अपने दम पर सरकार बनाई थी। लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने पटेल समुदाय को खुश करने के लिए उनकी जगह केशुभाई पटेल के सीएम पद की कुर्सी सौंप दी। यहीं से वाघेला और बीजेपी के बीच दरार की शुरुआत हो गई।
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