असम में UCC बिल को मंजूरी, शादी-तलाक से लेकर लिव-इन तक...10 पॉइंट में समझिए क्या-क्या बदलेगा?
Assam UCC Bill: असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक पास होने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद शुरू हो गया है। सरकार इसे महिलाओं को बराबरी, सुरक्षा और न्याय देने वाला ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि कई मुस्लिम संगठनों और विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) का कहना है कि नया कानून समाज में समान अधिकार सुनिश्चित करेगा और महिलाओं को मजबूत बनाएगा। दूसरी ओर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने इसे मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया है।

UCC लागू होने के बाद शादी, तलाक, विरासत, बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे कानूनी प्रक्रिया आसान होगी और फर्जी मामलों पर रोक लगेगी। हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। आइए जानते हैं कि असम में यूसीसी लागू होने के बाद कौन-कौन से 10 बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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एक से ज्यादा शादी करना होगा अपराध
यूसीसी लागू होने के बाद द्विविवाह और बहुविवाह पर सख्त रोक लगेगी। अगर कोई व्यक्ति एक से ज्यादा शादी करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 82 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। इसमें सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है।
शादी के लिए तय होगी समान उम्र
नए कानून के तहत सभी समुदायों में शादी के लिए लड़कों की न्यूनतम उम्र 21 साल और लड़कियों की 18 साल तय की गई है। इससे अलग-अलग पर्सनल लॉ की जगह एक समान नियम लागू होंगे।
धार्मिक परंपराओं पर नहीं लगेगी रोक
सरकार ने साफ किया है कि यूसीसी लागू होने के बाद भी लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार शादी कर सकेंगे। वैदिक विवाह, निकाह, सप्तपदी, आनंद कराई, आशीर्वाद और अहोम चकलोंग जैसी परंपराएं जारी रहेंगी।
शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी
यूसीसी के तहत सभी विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। शादी होने के 60 दिनों के भीतर दंपत्ति को सब-रजिस्ट्रार के पास विवाह का मेमोरेंडम जमा कराना होगा। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी शादी और धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगेगी।
रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर लगेगा जुर्माना
अगर कोई व्यक्ति तय समय के भीतर शादी या तलाक का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उस पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने पर तीन महीने तक की जेल, 25 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।
तलाक के नियम होंगे एक समान
नए कानून में तलाक के लिए सभी समुदायों में एक जैसे आधार लागू होंगे। क्रूरता, परित्याग और आपसी सहमति जैसे कारणों पर तलाक लिया जा सकेगा। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी मां को देने का प्रावधान भी रखा गया है।
विरासत में महिलाओं को बराबरी
UCC में संपत्ति और उत्तराधिकार के नियमों को भी समान बनाया गया है। पति या पत्नी, बच्चे और माता-पिता को बराबरी के आधार पर अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा।
वसीयत बनाने का मिलेगा कानूनी अधिकार
कानून के तहत कोई भी मानसिक रूप से स्वस्थ बालिग व्यक्ति गवाहों की मौजूदगी में लिखित वसीयत बना सकेगा। इससे संपत्ति विवाद कम करने की कोशिश की गई है।
लिव-इन रिलेशनशिप का भी होगा रजिस्ट्रेशन
UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी जरूरी होगा। अगर कोई कपल रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उसे तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
गलत जानकारी देने पर सख्त सजा
अगर कोई व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप या अन्य रजिस्ट्रेशन के दौरान जरूरी जानकारी छिपाता है या झूठे दस्तावेज देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में तीन महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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