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पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के सियासी सफर पर एक नजर

2017 में पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए 27 नवंबर 2015 को अमरिंदर सिंह को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई थी और वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी हैं।

नई दिल्ली। पंजाब में पटियाला के राजघराने से आने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। साल 2002 से 2007 तक राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके अमरिंदर सिंह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में दिग्गज बीजेपी नेता अरुण जेटली को करारी शिकस्त दी थी। पंजाब चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाने वाले अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर पर एक नजर...

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह के सियासी सफर पर एक नजर

राजघराने में जन्म और सेना में नौकरी
अमरिंदर सिंह का जन्म पटियाला में हुआ। उनके पिता महाराजा यादविंदर सिंह और मां मोहिंदर कौर थीं। उनकी पत्नी प्रेनीत कौर सांसद और 2009-14 के बीच केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं। उनके एक बेटा रनिंदर सिंह और एक बेटी जै इंदर कौर है। अमरिंदर सिंह के परिवार का सियासत से पुराना नाता रहा है। अमरिंदर सिंह ने नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पढ़ाई के बाद 1963 में भारतीय सेना ज्वाइन कर लिया हालांकि 1965 के शुरुआत में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पाकिस्तान से युद्ध शुरू होने की वजह से उन्होंने एक बार फिर सेना ज्वाइन की और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बतौर कैप्टन लड़े। युद्ध के बाद उन्होंने फिर से सेना छोड़ दी। READ ALSO: कांग्रेस का हाथ थामने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के बारे में जानिए सब कुछ

कैप्टन को कांग्रेस में लेकर आए राजीव गांधी
कांग्रेस में अमरिंदर सिंह की एंट्री पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कराई क्योंकि वे दोनों स्कूल के दोस्त थे। अमरिंदर सिंह पहली बार 1980 में लोकसभा चुनाव जीते। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने लोकसभा और कांग्रेस दोनों की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने शिरोमली अकाली दल की सदस्यता ले ली। उन्होंने राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ा और राज्य सरकार में मंत्री बन गए। 1992 में उनका अकाली दल से मोहभंग हुआ और उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (पी) के नाम से नई पार्टी बना ली। बाद में इस पार्टी का साल 1998 में कांग्रेस में विलय हो गया। यह विलय विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद हुआ। अमरिंदर को इस चुनाव में अपनी विधानसभा सीट में कुल 856 वोट मिले थे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद अमरिंदर सिंह 1999 से 2002 और 2010 से 2013 तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और इस बीच 2002 से 2007 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। READ ALSO: पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए क्यों खास हैं नवजोत सिंह सिद्धू?

आरोपों में घिरकर विधानसभा से हुए बाहर
अमरिंदर सिंह के खिलाफ साल 2008 में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। तत्कालीन अकाली दल-बीजेपी सरकार ने भ्रष्टाचार की जांच के लिए विधानसभा में स्पेशल कमेटी बनाई जिसने अमरिंदर को बर्खास्त कर दिया। साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के फैसले को असंवैधानिक करार दिया। साल 2008 में उन्हें पंजाब में चुनाव प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। साल 2013 से अब तक वह कांग्रेस की वर्किंग कमेटी में शामिल हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने अमृतसर लोकसभा सीट से बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली को हराया। इस सीट पर बीजेपी लगातार तीन बार से चुनाव जीत रही थी। अमरिंदर सिंह पांच बार पंजाब विधानसभा के लिए चुने गए जिसमें से तीन बार पटियाला (शहरी), सामना और तलवंडी साबो से एक-एक बार चुनाव जीता। 2017 में पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए 27 नवंबर 2015 को अमरिंदर सिंह को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। READ ALSO: CM बादल के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह

ऑल इंडिया जाट महासभा के अध्यक्ष
अमरिंदर सिंह ऑल इंडिया जाट महासभा के अध्यक्ष हैं। वह इस संगठन से करीब 30 साल से जुड़े हैं। 1980 में कैप्टन भगवान सिंह इसके अध्यक्ष थे तब से अमरिंदर सिंह इस संगठन में हैं। उन्होंने जाटों को OBC कैटेगरी में आरक्षण देने की भी मांग उठाई।

किताबें भी लिखीं
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने युद्ध और सिख इतिहास पर किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने ए रिज टू फार, लेस्ट वी फॉरगेट, द लास्ट सनसेट: राइज एंड फॉल ऑफ लाहौर दरबार और द सिख इन ब्रिटेन: 150 ईयर्स ऑफ फोटोग्राफ्स लिखी हैं। उनकी हालिया किताबों में ऑनर एंड फिडेलिटी: इंडियाज मिलिट्री कॉन्ट्रीब्यूशन टु द ग्रेट वार 1914-1918 साल 2014 में चंडीगढ़ में रिलीज हुई थी। इसके अलावा द मानसून वार: यंग ऑफिसर्स रेमनिस- 1965 इंडिया पाकिस्तान वार जिसमें उन्होंने अपने युद्ध के अनुभवों को साधा किया है।

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