10,000 जवानों की तैनाती पर केंद्र सरकार को वॉर्निंग, अगर कश्मीर से 35A हटा तो...
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अतिरिक्त बलों की तैनाती के साथ ही यहां का माहौल गर्मा गया है। यहां पर बसे लोगों और राजनीतिक पार्टियों के बीच धारा 35ए को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों के मुताबिक केंद्र सरकार धारा 35ए को हटाने की तैयारी कर चुकी है। लोग इस कदर घबराएं हुए हैं कि वे अपने घरों में रोजमर्रा की चीजों को इकट्ठा करने में लग गए हैं। इस बीच राज्य की राजनीतिक पार्टियों की ओर से केंद्र की बीजेपी सरकार को चेतावनी दी गई है कि यहां पर किसी भी तरह का कोई गलत कदम नहीं उठाना चाहिए।

'कई दशकों तक जारी रहेगी हिंसा'
शनिवार को घाटी में अतिरिक्त बल का पहली टुकड़ी पहुंची है। इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों की ओर से केंद्र सरकार को चेतावनी दी गई है। पार्टियों ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह राज्य में बिना दिमाग के किसी भी तरह का कोई कदम उछाने की कोशिश न करे। पूर्व मंत्री सज्जाद लोन जिन्हें बीजेपी का करीबी माना जाता है उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह किया है। लोन ने कहा है कि किसी भी प्रकार के दुस्साहस का मतलब होगा घाटी में अगले कई दशकों तक हिंसा की स्थिति जारी रहेगी। साथ ही इससे उन लोगों की मानसिकता को बल मिलेगा जो खुद को भारतीय नहीं मानते हैं। लोगों में इस बात का भय जगह बना रहा है कि केंद्र सरकार धारा 35ए और धारा 370 को हटा सकती है। इस वर्ष घाटी में विधानसभा चुनावों और राष्ट्रपति शासन की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है। तब से लोग 35ए और 370 को लेकर आशंकित हैं। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए करीब 40,000 अतिरिक्त सुरक्षाबलों को घाटी में तैनाती के लिए भेजा गया था। ऐसे में पहले से जब इतने जवान घाटी में मौजूद हैं तो 10,000 और जवानों की तैनाती पर लोग हैरान हैं।
पुलिस ऑफिसर्स ने बताया सिर्फ रूटीन फैसला
घाटी के सीनियर पुलिस ऑफिसर्स ने यहां पर अतिरिक्त बल की तैनाती को सिर्फ रूटीन करार दिया है। उन्होंने कहा है कि एक्स्ट्रा ट्रूप्स की तैनाती बस अपने बाकी साथियों को थोड़ा आराम देने के मकसद से की जा रही है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को घाटी में 10,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती का फैसला लिया था। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशंस को और ताकतवर बनाने के मकसद से अतिरिक्त बल को तैनात किया है। साथ ही घाटी की कानून व्यवस्था भी इस एक्स्ट्रा डेप्लॉयमेंट में सबसे अहम है। जम्मू कश्मीर पुलिस में एडीशनल डीजीपी मुनीर खान ने कहा कि उनकी तरफ से 200 अतिरिक्त कंपनियों के लिए अनुरोध किया गया था ताकि जरूरी एक्सरसाइज के लिए बटालियन को भेजा जा सके। वहीं राज्य पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह की मानें तो घाटी में अतिरिक्त बलों को सिर्फ कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बुलाया गया है।












Click it and Unblock the Notifications