Etawah: कथावाचक अपमान केस में नया मोड़, दो आधार कार्ड वाले मुकुट मणि पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
इटावा जिले के बहुचर्चित कथावाचक अपमान मामले ने अब नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जहां पहले कथावाचकों के साथ मारपीट करने और उनकी चोटी काटने वालों पर कार्रवाई हुई थी, वहीं अब कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहयोगी संत सिंह यादव पर फर्जी आधार कार्ड बनवाने और जाति छिपाकर कथा करने के आरोप में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो गया है।
यह पूरा मामला इटावा के बकेवर थाना क्षेत्र के दादरपुर गांव का है। 21 जून को भागवत कथा के दौरान कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत सिंह यादव पर आरोप लगा कि उन्होंने जाति छिपाकर कथा की। आरोप लगते ही कथावाचकों की पिटाई की गई, उनकी चोटी काट दी गई और अपमानजनक व्यवहार किया गया।

वायरल वीडियो के बाद एक्शन में आई पुलिस
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहीं कथावाचक मुकुट मणि यादव ने खुद पर हुए अत्याचार को लेकर सपा सांसद जितेंद्र दोहरे के साथ एसएसपी से मिलकर शिकायत दर्ज कराई।
कथावाचकों पर दर्ज हुआ नया केस
अब इस मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कथावाचकों पर भी मुकदमा दर्ज हो गया। बकेवर थाने में जयप्रकाश तिवारी की शिकायत पर मुकुट मणि यादव और संत सिंह यादव पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 299, 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि कथावाचकों ने फर्जी आधार कार्ड बनवाकर अपनी जाति छुपाई और कथा करने पहुंचे।
कथावाचकों की सफाई और राजनीतिक हलचल
कथावाचक मुकुट मणि ने सफाई दी कि ब्राह्मणों ने उनकी जाति पूछी और यादव होने पर उन पर दलित होने का आरोप लगाकर अमानवीय व्यवहार किया गया। वहीं इस घटना के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कथावाचकों को लखनऊ बुलाकर आर्थिक मदद दी और यूपी सरकार पर असंवैधानिक कामों को समर्थन देने का आरोप लगाया।
ब्राह्मण महासभा ने भी की कार्रवाई की मांग
ब्राह्मण महासभा ने कथावाचकों पर धार्मिक भावना भड़काने और महिलाओं से अभद्रता करने का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की। महासभा ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
जांच जारी, दोनों पक्षों पर कसेगा कानून का शिकंजा
यह मामला अब केवल जातिगत विवाद नहीं रहा बल्कि कानून, समाज और राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। पुलिस दोनों पक्षों की जांच में जुटी है और आने वाले दिनों में यह केस उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
दो आधार कार्ड रखना वैध है या अवैध?
एक व्यक्ति द्वारा दो आधार कार्ड रखना अवैध है और यह भारतीय कानून के तहत धोखाधड़ी की कैटेगरी में आता है। आधार कार्ड एक यूनिक पहचान पत्र है, जो हर भारतीय नागरिक के लिए एक ही बार जारी होता है। अगर कोई व्यक्ति एक ही नाम या अलग-अलग नाम और पते पर दो आधार कार्ड बनवाता है, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं और लाभों का दुरुपयोग माना जाता है, बल्कि इसके लिए कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे मामलों में आधार एक्ट 2016 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
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