PNB Scam: नीरव मोदी और उसके परिवार के खिलाफ इंटरपोल को किया गया अलर्ट

नई दिल्ली। पीएनबी घोटाले में नीरव मोदी के खिलाफ लगातार जांच एजेंसिया अपना शिकंजा कसती जा रही हैं। नीरव मोदी के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन को सक्रिय कर दिया गया है ताकि जल्द से जल्द नीरव मोदी को गिरफ्त में लिया जा सके। नीरव मोदी के अलावा उसकी मां, भाई निशाल, पत्नी अमी और पार्टनर मेहुल चिनुभाई चोकसी के खिलाफ विसरण नोटिस जारी किया गया है। साथ ही सभी पार्टनर डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोर्ट व स्टेलर डायमंड के खिलाफ भी नोटिस जारी किया गया है।

सीबीआई ने दर्ज किया था मामला

सीबीआई ने दर्ज किया था मामला

आपको बता दें कि सीबीआई ने ने नीरव मोदी, उसके भाई निशाल, पत्नी अमी और बिजनेस पार्टनर मेहुल चिनुभाई चोकसी के साथ ही उसकी तमाम कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, यह मामला गत वर्ष पीएनबी के कथित तौर पर 280.70 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के चलते दर्ज किया गया था। साथ ही सीबीआई को बुधवार को इनके खिलाफ एक बार फिर से दो ताजा मामले दिए गए हैं, जिसमे आरोप लगाया गया है कि नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ 11400 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की है।

फर्जी तरीके से हासिल किया एलओयू

फर्जी तरीके से हासिल किया एलओयू

बुधवार को पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद से ही लगातार सीबीआई और ईडी नीरव मोदी के तमाम ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और अभी तक उसकी कुल 5500 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और गोल्ड को जब्त कर चुकी है। नीरव मोदी पर आरोप है कि उसने फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग के जरिए पीएनबी को 11400 करोड़ रुपए की चपत लगाई है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब नीरव मोदी की ओर से मुंबई स्थित पीएनबी की शाखा में लोन के लिए आवेदन दिया गया। लेकिन जब बैंक के अधिकारी ने नीरव मोदी की कंपनी से क्रेडिट के तौर पर दस्तावेज मांगे तो उनकी ओर से कहा गया कि यह दस्तावेज पहले ही बैंक को दिए जा चुके हैं, लेकिन पड़ताल में यह बात सामने आया कि बैंक के पास इस तरह के दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं है।

क्या है एलओयू

क्या है एलओयू

आपको बता दें कि लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग बैंक की ओर से जारी किया जाता है, जिसे दूसरे बैंक से कैश कराया जा सकता है। सीबीआई को इस बात की जानकारी दी गई कि इस तरह के 8 एलओयू जारी किए गए, लेकिन इसकी जानकारी बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब नीरव मोदी की कंपनी ने एक बार फिर से लोन की मांग की। बैंक के जो अधिकारी पहले उसकी मदद करते थे वो रिटायर हो चुके थे, ऐसे में जब बैंक ने इसकी गारंटी मांगी तो तो कंपनी की ओर से कहा गया कि यह पहले से ही बैंक को मुहैया कराया जा चुका है। जिसके बाद बैंक ने उसे तलाशना शुरू किया तो इस बात की जानकारी मिली कि बैंक की ओर से फर्जी एलओयू जारी किए गए।

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