Voice of Global South Summit: पिछले 3 साल रहे बेहद कठिन, बढ़ती कीमतों ने विकास को किया प्रभावित, बोले PM मोदी
वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 3 साल बेहद कठिन रहे हैं। खासकर हम विकासशील देशों के लिए काफी मुश्किलों से भरा रहा है।

Voice of Global South Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट के समापन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में इस शिखर सम्मेलन में 120 से अधिक विकासशील देशों की भागीदारी देखी गई है। वैश्विक दक्षिण का अब तक का सबसे बड़ा वर्चुअल जमावड़ा देखने को मिला। पीएम मोदी ने कहा कि मैं इस समापन सत्र में आपकी कंपनी पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।
वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 3 साल बेहद कठिन रहे हैं। खासकर हम विकासशील देशों के लिए काफी मुश्किलों से भरा रहा है। COVID-19 महामारी की चुनौतियों, ईंधन, उर्वरक और अनाज खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने हमारे विकास के प्रयासों को प्रभावित किया है।
वहीं इससे पहले गुरुवार को उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने युद्ध और आतंकवाद के कारण उत्पन्न विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया इस वक्त संकट की स्थिति से गुजर रही है। ये संकट कब तक रहेगा, इसकी भविष्यवाणी करना फिलहाल अभी मुश्किल है। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने खाद्य, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों, कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता व्यक्त की।
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विभिन्न विकासशील देशों के कई नेताओं की उपस्थिति में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि दुनिया संकट की स्थिति में है। इनमें से अधिकांश वैश्विक चुनौतियां ग्लोबल साउथ की तरफ से नहीं पैदा की गईं हैं। बावजूद ये चुनौतियां हमें प्रभावित करती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने "वैश्विक साउथ के भाइयों" के साथ अपने विकास के अनुभव को साझा किया है।
पीएम ने कहा कि जैसा कि भारत ने इस वर्ष अपनी जी-20 अध्यक्षता शुरू की है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज को बढ़ाना है। आपको बता दें कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों को एक साथ लाने के लिए दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह सम्मेलन यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों से संबंधित अपनी आम चिंताओं को साझा करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।
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