मेरठ-लखनऊ रूट पर आज से दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन, PM नरेंद्र मोदी ने दिखाई हरी झंडी
Vande Bharat train: मेरठ-लखनऊ के बीच आज से वंदे भारत ट्रेन चलेगी। जी हां...प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मेरठ-लखनऊ, मदुरै-बंगलूरू और चेन्नई-नागरकोइल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर मेरठ से भाजपा सांसद अरूण गोविल ने कहा, "आज का दिन बहुत ऐतिहासिक है।'
पीएम मोदी ने कहा, 'आज मेरठ-लखनऊ रूट पर वंदे भारत ट्रेन के जरिए यूपी और खासकर पश्चिमी यूपी के लोगों को भी खुशखबरी मिली है। मेरठ और पश्चिमी यूपी क्रांति की धरती है। आज यह क्षेत्र विकास के नई क्रांति का साक्षी बन रहा है। वंदे भारत आधुनिक भारतीय रेलवे का नया चेहरा है।'

आज शहर में, हर रूट पर वंदे भारत की मांग है। हाई-स्पीड ट्रेनों के आने से लोगों में अपने व्यापार और रोजगार को, अपने सपनों को विस्तार देने का भरोसा जगता है। आज देशभर में 102 वंदे भारत रेलवे सेवाएं संचालन हो रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि आज उत्तर से दक्षिण तक देश की विकास यात्रा में एक और अध्याय जुड़ रहा है।
आज से मदुरै - बेंगलुरु , चेन्नई - नागरकोइल और मेरठ - लखनऊ के बीच वंदे भारत ट्रेनों की सेवा शुरू हो रही है। वंदे भारत ट्रेनों का ये विस्तार, ये रफ्तार हमारा देश विकसित भारत की ओर कदम दर कदम बढ़ रहा है। आज जो तीन वंदे भारत ट्रेनें शुरू हुई हैं इससे देश के महत्वपूर्ण शहर और ऐतिहासिक जगहों को कनेक्टिविटी मिली है।
ये ट्रेनें तीर्थयात्री के लिए सुविधा देगी और इससे छात्रों, किसानों आईटी के लोगों को बहुत लाभ होगा। जहां वंदे भारत की सुविधा पहुंच रही है वहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दक्षिण के राज्यों का तेज विकास बहुत जरूरी है। दक्षिण भारत में अपार प्रतिभा है, अपार संसाधन और अवसर हैं।
इसलिए, तमिलनाडु और कर्नाटक समेत पूरे दक्षिण का विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 10 वर्षों में इन राज्यों में रेलवे की विकास यात्रा इसका उदाहरण है। इस साल के बजट में हमने तमिलनाडु को 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रेलवे बजट दिया है। ये बजट 2014 की तुलना में 7 गुना से अधिक है।
इसी तरह कर्नाटक के लिए भी इस बार 7 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट आवंटित हुआ है। ये बजट भी 2014 की तुलना में 9 गुना अधिक है। पीएम ने कहा कि बीते 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ सके हैं। बीते वर्षों में रेलवे ने अपनी मेहनत से दशकों पुरानी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगाई है। लेकिन हमें अभी इस दिशा में बहुत लंबा सफर तय करना है। हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक भारतीय रेल गरीब, मध्यम वर्ग सभी के लिए सुखद यात्रा की गारंटी नहीं बन जाती।












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