मोदी सरकार ने बदल दी झारखंड की तस्वीर, बच्चों को मिल रही मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बुन रहे अपने सपने
केंद्र की मोदी सरकार के नेतृत्व में झारखंड की तस्वीर बदल रही है। पहले के झारखंड और अब के झारखंड में काफी बदलाव आ गया है। यहां के लोग मोदी सरकार की नीतियों से सशक्त हो रहे हैं। हाल ही में जब झारखंड के दो शिक्षकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तालियों की करतल ध्वनि के बीच राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया, तो पूरा राज्य गौरवान्वित हो उठा।
सम्मान पाने वाले पहले शिक्षक कोडरमा के मनोरंजन पाठक हैं जो तिलैया सैनिक स्कूल में NCC ऑफिसर और कंप्यूटर शिक्षक हैं। वह बड़ी संख्या में अपने छात्रों को देश सेवा के लिए NDA में भेजने में सफल रहे हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से पुस्तकालय स्वचालन के जरिए ई-पुस्तकालय भी विकसित की है जो छात्रों को उत्कृष्ठ बनाने में मदद कर रही है। वहीं दूसरे शिक्षक मो. इजाजुल हक हैं। वे चतरा के दीवानखाना मिडिल स्कूल के हेडमास्टर हैं। जिन्हें खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने, छात्रों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयासरत रहने और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सम्मानित किया गया।

झारखंड में यह अलख इन्हीं कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उठाए गए क्रांतिकारी कदमों और प्रोत्साहन से जगी है। जिसका छात्रों को खूब लाभ होने लगा है। इसके लिए शिक्षकों को भी प्रोत्साहित किया गया है। क्योंकि शिक्षक भी सरकार के प्रयासों में भागीदार बन अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे रहे हैं।
दूर-दराज बसे छोटे-छोटे गांवों और जनजातीय क्षेत्रों से छात्र स्कूलों में पढ़ने के लिए जाते रहे हैं, लेकिन गुजरे दशकों में इनके लिए स्तरीय शिक्षा की कोई गारंटी नहीं रही। लेकिन फिर इन कुछ वर्षों में ही कुछ ऐसे बड़े प्रयास होते देखे गए, जिसने झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की दशा ही पलट कर रख दी। झारखंड जैसे राज्य में छात्रों के समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभरी है।
इसके दायरे में राज्य के वंचितों और पिछड़े से पिछड़े वर्ग के बच्चों को लाने की कोशिश की गई है। वर्तमान में झारखंड के सभी 24 जिलों में कुल 88 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हैं। केंद्र सरकार के प्रयासों से झारखंड में एकलव्य मॉडल स्कूलों को समय के साथ और उन्नत किया गया है। इन स्कूलों में आने के लिए समय-समय पर छात्रों को प्रोत्साहित भी किया जाता है। जिसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं।
झारखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। उच्च शिक्षा के लिए जो छात्र पहले दूसरे राज्यों की ओर रुख किया करते थे, उन्हें अब यहीं पर अलग-अलग व्यवसायिक पाठ्यक्रम की सुविधा मिलने लगी है। सरकार ने झारखंड को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए चेरी मनातू में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के नए और विशालकाय कैंपस का निर्माण करवाया है। पूरे 319 एकड़ में तैयार हुए इसके भव्य परिसर पर करोड़ों रुपये की लागत आई है। इसमें 9 स्कूलों के साथ 24 अलग-अलग विभाग हैं। झारखंड केंद्रेय विश्वविद्यालय में अभियंत्रण, विज्ञान, मानविकी और अन्य क्षेत्रों में 20 एकीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के शिक्षण की व्यवस्था है। इसके अलावा यहां कई अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर के 27 और पीएचडी के 22 पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
झारखंड में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और समय के साथ उसे उन्नत करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में पीएम श्री विद्यालयों की शुरुआत एक मील का पत्थर साबित होती दिख रही है। इस योजना के तहत देशभर में 14 हजार से ज्यादा स्कूलों को पीएम श्री के तहत विकसित किया जा रहा है। इसमें झारखंड के अधिकतम 528 स्कूलों का चयन किया जा सकता है। जिन स्कूलों का चयन किया जा चुका है, उसे अपग्रेड करने का काम शुरू हो चुका है।
इस योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित स्कूलों को विकसित करने के लिए अधिकतम 2 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इसमें से 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार, जबकि 40 फीसदी राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। ये स्कूल 12वीं कक्षा तक के होंगे, जहां स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल मैदान के साथ-साथ काबिल शिक्षकों की भी व्यवस्था रहेगी। इसके जरिए शिक्षा के स्तर में सुधार और छात्रों के विकास पर फोकस किया जा रहा है।
झारखंड में स्कूली शिक्षा से लेकर उत्कृष्ट शैक्षिक संस्थान और केंद्रीय यूनिवर्सिटी में स्तरीय शिक्षा और एक ही जगह पर अनेकों कोर्सों के उपलब्ध होने से छात्रों के भविष्य की डगर ना सिर्फ जगमग हो रही है, बल्कि ये केंद्र सरकार के विजन, शैक्षिक उत्थान, सामाजिक प्रभाव के साथ-साथ आर्थिक विकास के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।












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