पिछली शताब्दी के नियम-कानूनों से अगली शताब्दी का भविष्य तय नहीं हो सकता: पीएम मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को आईआईटी दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने समारोह के संबोधन में कहा, आज तकनीक की दुनिया के लिए बहुत अहम दिन है। आज आईआईटी दिल्ली के माध्यम से देश को 2,000 से ज्यादा तकनीक के बेहतरीन विशेषज्ञ मिल रहे हैं। इसके पहले मुझे आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी गुवाहाटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का भी अवसर मिला था। इन सभी जगहों पर मुझे ये समानता दिखी कि हर जगह कुछ न कुछ नवीनतम हो रहा है।
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उन्होंने कहा, कोरोना का ये संकटकाल दुनिया में बहुत बड़े बदलाव लेकर आया है, पोस्ट कोविड दुनिया बहुत अलग होने जा रही है। और इसमें सबसे बड़ी भूमिका तकनीक की ही होगी। कोविड-19 ने दुनिया को एक बात और सीखा दी है कि वैश्वीकरण महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ-साथ आत्मनिर्भरता भी उतनी ही जरूरी है। आज देश में आपकी जरूरतों को, भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए एक के बाद एक निर्णय लिये जा रहे हैं, पुराने नियम बदले जा रहे हैं। मेरी ये सोच है कि पिछली शताब्दी के नियम-कानूनों से अगली शताब्दी का भविष्य तय नहीं हो सकता है। नई शताब्दी, नए संकल्प, नई शताब्दी, नए रीति रिवाज, नई शताब्दी, नए कानून।
आपको बता दें प्रधानमंत्री के साथ इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, हाल में सरकार ने एक और योजना शुरू की है, जिसमें तकनीक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है। ये है स्वामित्व योजना, इसके तहत भारत के गांव में जमीन और घर की प्रॉपर्टी की मैपिंग की जा रही है। तकनीक की जरुरत और इसके प्रति भारतीयों में आस्था, यही आपके भविष्य को रोशनी दिखाती है। पूरे देश में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं, अपार चुनौतियां हैं जिसके समाधान आप दे सकते हैं।
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