कोरोना : SAARC देशों से PM मोदी कर रहे चर्चा, कहा- मिलकर लड़ना होगा
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी कोरोना के खतरे से निपटने के लिए सार्क देशों के प्रतिनिधियों के साथ कर चर्चा रहे हैं। जिसमें श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोली, भूटान के प्रधानमंत्री, नेपाल के प्रधानमंत्री शामिल हैं। रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिएसार्क देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि, मैं इतने कम वक्त में इस चर्चा में शामिल होने के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं खासकर पीएम ओली का शुक्रिया अदा करता हूं, जो सर्जरी के तुरंत बाद हमारे साथ चर्चा में शामिल हो रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि, जैसा कि हम जानते हैं कोविड-19 को हाल ही में महामारी घोषित किया गया है। हमारे क्षेत्र में अब तक लगभग 150 केस सामने आए हैं, हमें सतर्क रहने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि, जब हम चुनौती का सामना कर रहे हैं, मैं आपको इस वायरस के फैलने को लेकर भारत के अनुभव के बारे में बताना चाहता हूं। 'तैयार रहें, लेकिन घबराएं नहीं' यही हमारे मार्गदर्शन का मंत्र है।
पीएम मोदी ने सार्क देशों से कहा कि, हमने विदेशों से 1400 भारतीयों को बाहर निकाला है। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के कुछ नागरिकों की भी हमने मदद की है। चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि, हमने विदेशों से 1400 भारतीयों को बाहर निकाला है। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के कुछ नागरिकों की भी हमने मदद की है। चर्चा के दौरान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि, चीन, अमेरिका या फिर ईरान आदि की चीजें हमारे लिए उपयुक्त नहीं हैं।
गनी ने कहा कि, भारत सार्क का एक महत्वपू्र्ण सदस्य है। भारत शंघाई को-ऑपरेशन का सदस्य है। चीन का उपाय हमारे लिए कितने कारगर हैं, यह देखने की जरूरत है, जिससे कि हम ईरान की मदद कर सकें। इसके बाद मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने चर्चा में कहा कि, मैं पीएम मोदी को धन्यवाद कहना चाहता हूं। संकट के समय में हम साथ आते हैं। 2003 में सार्स के खतरे के वक्त मालदीव ने सार्क के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक आयोजित की थी। कोई देश अकेले इस वायरस से नहीं निपट सकता है, इसमें सबकी मदद चाहिए।
उन्होंने कहा कि, मालदीव भाग्यशाली है कि उसे भारत की सहायता मिली है, इसके लिए मैं पीएम मोदी और भारत के लोगों का शुभकामनाएं देता हूं। हमारे लिए दवाएं और मेडिकल टीम भेजी गईं। मालदीव में इस वायरस का पहले केस सामने आने के बाद पर्यटन में काफी गिरावट दर्ज की गई है। अगर पर्यटकों की कमी जारी रही तो मालदीव के अर्थव्यवस्था पर काफी असर होगा।
कोरोना महामारी पर बोलते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षा ने कहा कि, पीएम मोदी का इस विडियो कॉन्फ्रेंसिंग का आयोजन करने के लिए शुक्रिया। हमारी बड़ी चुनौती है कि इस वायरस को श्रीलंका में फैलने से रोकना है। श्रीलंका वापस आने वालों को 14 दिनों की निगरानी में रखा जा रहा है। हमने यूनिवर्सिटीज और शिक्षण संस्थानों को भी बंद किया है। राजपक्षे ने कहा कहा कि, महामारी ने हमारी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से झटका दिया है, विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र जो पिछले वर्षों के आतंकवादी हमलों के बाद ठीक हो रहा था। मैं सार्क नेताओं को हमारी अर्थव्यवस्थाओं को कठिन दौर से निपटने में सहायता करने के लिए तंत्र तैयार करने की सलाह देता हूं।
चर्चा में बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने कहा कि, पीएम मोदी का इस कदम के लिए के लिए शुक्रिया। वुहान से हमारे 23 छात्रों को निकालने के लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। हमने सभी जिलों के अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के लिए स्पेशल बेड लगाए हैं। हमारे पास काफी टेस्टिंग किट, इन्फ्रारेड थर्मामीटर आदि हैं। वहीं नेपाल की पीएम केपी शर्मा ओली ने कहा कि, मैं पीएम मोदी का इस चर्चा के आयोजन के लिए शुक्रिया करता हूं। कई एजेसियों की को-ऑर्डिनेशन कमिटी बनाई गई है। हमने विदेशियों और नॉन रेसिडेंट नेपाली लोगों मूवमेंट पर रोक लगाई है।
चर्चा के दौरान भूटान के राष्ट्राध्यक्ष लोटे शेरिंग ने कहा कि, मैं पीएम मोदी को सबको साथ लाने के लिए शुक्रिया कहता हूं। इस बीमारी से निपटने के लिए सबका साथ आना जरूरी है। हमारा पहला मामला सामने आने के बाद उसके इलाज और उसके संपर्क में आने वाले 48 लोगों की पहचान के लिए हमने काफी मेहनत की है।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि कोरोना पर सार्क देशों की चर्चा में जफर मिर्चा ने कहा कि, जिस तरह कोरोना से 138 देश प्रभावित हैं, इसलिए कोई भी देश इसके लिए कदम उठाए बिना नहीं रह सकता है। पाकिस्तान कोविड-19 के फैलाव को सीमित करने में अब तक सफल रहा है। WHO ने इसकी प्रशंसा की है। सभी सदस्य देशों के संबोधन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि, मैं कोविड -19 के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाने का प्रस्ताव देता हूं। भारत इसके लिए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद का प्रस्ताव देता है। इसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। हम इमरजेसी रिस्पॉन्स टीमों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग कैप्सूल भी बना सकते हैं।












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